नूरमहल में गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर उमड़ा सैलाब: दिव्य आरती और वैदिक मंत्रोच्चारण की रही गूंज; पंजाब भर से पहुंचे लाखों श्रद्धालु – Jalandhar News

नूरमहल में गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर उमड़ा सैलाब:  दिव्य आरती और वैदिक मंत्रोच्चारण की रही गूंज; पंजाब भर से पहुंचे लाखों श्रद्धालु – Jalandhar News




दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के नूरमहल आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव उल्लास से मनाया गया। इस भव्य आयोजन में पंजाब भर से 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण, भव्य आरती, आध्यात्मिक प्रवचन और भक्ति संगीत के माध्यम से संपूर्ण आश्रम परिसर अलौकिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
संत-विद्वानों ने मानव जीवन में गुरु की महत्ता, आत्ममंथन और वर्तमान समय की वैश्विक चुनौतियों में ब्रह्मज्ञान की भूमिका पर विस्तृत प्रकाश डाला।
इस पावन समागम का भव्य शुभारंभ सर्वश्री आशुतोष महाराज जी के ब्रह्मज्ञानी शिष्य-शिष्याओं द्वारा किए गए पवित्र वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। वेद-रीतियों की दिव्य ध्वनियों ने समूचे आश्रम परिसर को अलौकिक सकारात्मकता और शांति से परिपूर्ण कर दिया। पंजाब भर से पहुंचे 5 लाख से अधिक श्रद्धालु मंच का कुशल संचालन करते हुए साध्वी तपस्विनी भारती ने पंजाब के दूर-दराज भागों से पधारे 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिनंदन किया। इसके उपरांत समस्त मानवता के कल्याण, विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और प्रत्येक प्राणी के सुख-समृद्धि के लिए सामूहिक एवं भावपूर्ण प्रार्थना की गई। दिव्य आरती एवं विधिवत पूजन संपन्न हुआ प्रार्थना के बाद पूज्य सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य आरती एवं विधिवत पूजन संपन्न हुआ। सैकड़ों प्रज्वलित दीपों की पावन ज्योति, सुगंधित पुष्पों की महक और हजारों श्रद्धालुओं के एकस्वर भाव ने ऐसा आध्यात्मिक दृश्य प्रस्तुत किया, मानो हर हृदय में गुरु-भक्ति का अलौकिक दीप प्रज्वलित हो उठा हो। गुरु पूर्णिमा शिष्य के लिए आत्ममंथन की पावन कसौटी आध्यात्मिक विचारों की श्रृंखला में साध्वी वैष्णवी भारती ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि शिष्य के लिए आत्ममंथन की एक पावन कसौटी है। यह पर्व हमें यह विचार करने का अवसर देता है कि बीते 365 दिनों में हम गुरु की आज्ञाओं पर कितने खरे उतरे। सच्चा समर्पण केवल बाहरी क्रियाओं में नहीं, बल्कि गुरु के सिद्धांतों को अपने आचरण में ढालने में है। गुरु के निर्देशों का निष्काम भाव से पालन करें स्वामी मोहनपुरी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु के निर्देशों का निष्काम भाव से पालन करना और जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में सत्य के मार्ग पर स्थिर रहना ही वास्तविक गुरु-पूजा है। जो शिष्य निष्ठा के साथ गुरु के मार्ग पर चलता है, वह संसार की प्रशंसा, निंदा या प्रतिकूल परिस्थितियों से विचलित नहीं होता। कार्यक्रम के अंतिम सोपान में स्वामी सज्जनानंद ने नूरमहल आश्रम की आध्यात्मिक महिमा पर प्रकाश डाला। वर्तमान युग की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए साध्वी मानस्विनी भारती जी ने कहा की कुटिल चाल कलिकाल चल रहा, युग की गति पहचानो। आज विश्‍व भर में युद्ध, प्राकृतिक असंतुलन और नैतिक मूल्यों का ह्रास देखने को मिल रहा है। ऐसे संकटपूर्ण समय में केवल ब्रह्मज्ञान से जागृत साधक ही अपने विवेक, साधना और गुरु के मार्गदर्शन के बल पर निर्भय और सुरक्षित रह सकता है।



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