लिव-इन रिलेशनशिप पर बोले भागवत: इसमें कोई जिम्मेदारी नहीं होती, शादी अनुशासन सिखाती है
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि शादी एक ऐसा अनुशासन है जो धर्म सिखाता है। उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप की सच्चाई पूरी दुनिया में देखी जा सकती है। भागवत हैदराबाद में विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित ‘समकालीन मातृत्व’ विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। शादी और लिव-इन पर क्या बोले भागवत? भागवत ने कहा कि शादी एक अनुशासन है जो धर्म को स्थापित करता है। इसका विकल्प लिव-इन रिलेशनशिप है, जिसे आधुनिकता कहा जाता है। उन्होंने सवाल किया कि इसके परिणाम क्या हैं? लोग जिम्मेदारी नहीं चाहते, सिर्फ खुशी चाहते हैं। जब तक मन करे साथ रहो और जब मन न करे तो अलग हो जाओ। इसमें कोई जिम्मेदारी नहीं होती। उन्होंने कहा कि इसके साथ क्या बढ़ेगा और दुनिया में क्या बढ़ रहा है, इसे चारों तरफ देखा जा सकता है। पश्चिमी संस्कृति की नकल पर जताई चिंता लिव-इन रिलेशनशिप के संदर्भ में उन्होंने इसे पतन और पश्चिमी संस्कृति की अंधी नकल बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिकता की जरूरत है और समय के साथ बदलना देश की परंपराओं का भी एक नियम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिकता का स्वागत है। नई पीढ़ी और एलजीबीटीक्यू पर कही ये बात आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज की पीढ़ी (जेन जेड) नकल करने वाली और भावुक है। वे शांत दिमाग से नहीं सोचते और जो उन्हें सही लगता है, वे उसी के प्रति आकर्षित हो जाते हैं। एलजीबीटीक्यू समुदाय पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे हमारे समाज का ही हिस्सा हैं और उन्हें हीन भावना से नहीं देखा जाना चाहिए। परिवार में संवाद और मोबाइल अनुशासन पर जोर भागवत ने माता-पिता को मोबाइल फोन के इस्तेमाल में अनुशासन बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के बच्चों के सवालों के जवाब देने और परिवार से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए सदस्यों के बीच आपसी बातचीत बहुत जरूरी है।
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