पेपर लीक के खिलाफ कल नया बिल आ सकता है: जांच के लिए 2 महीने मिलेंगे; 10 साल जेल और ₹50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान
नई दिल्ली18 मिनट पहले
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केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन करने जा रही है।
पीएम नरेंद्र मोदी के आश्वासन के बाद सोमवार को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में नया बिल पेश कर सकते हैं। इसमें सजा और जुर्माने के प्रावधानों को और सख्त किया गया है।

स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट
बिल में दो नई धाराएं 12ए और 12बी जोड़ी गई हैं। इसके तहत केंद्र सरकार एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन कर सकेगी। केंद्रीय जांच एजेंसी या एसआईटी को केंद्र सरकार द्वारा मामला सौंपे जाने के 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए रोजाना सुनवाई होगी। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित करेंगे। चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा।
अपील के लिए भी सख्त नियम
बिल में अपील के लिए भी समय सीमा तय की गई है। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकेगी।
ऐसी अपील पर दो जजों की बेंच सुनवाई करेगी और इसे 3 महीने के भीतर निपटाने का प्रयास किया जाएगा। अपील फैसले के 30 दिनों के भीतर करनी होगी, जिसे विशेष परिस्थितियों में 90 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
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पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों छात्रों, उनके माता-पिता के लिए पीड़ादायक है। इसलिए पेपर लीक से अब तक, पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए हैं। गुनहगारों को पकड़ा है, वे जेल में हैं। हमारी जिम्मेदारी थी कि छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में 22 लाख छात्रों का एग्जाम कराया। 19 जुलाई को रिजल्ट भी आ गया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्देश दिया…
उन्होंने यह भी कहा- हम इतने से संतोष करने वाले नहीं हैं। इसलिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्देश दिया है।दरअसल, यह पूरा मामला 3 मई को हुए NEET UG पेपर लीक से जुड़ा है।
पब्लिक एग्जामिनेशन्स प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट के बारे में जानें…
- लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 देश का पहला सेंट्रल एंटी-पेपर लीक कानून है। इसे 12 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू किया गया है। इसका मकसद एंट्रेंस एग्जाम में पेपर लीक, नकल और परीक्षा घोटालों पर रोक लगाना है।
- इस कानून के तहत पेपर लीक करने वालों को 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख तक का जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोई गिरोह शामिल है तो उसके लिए 5 से 10 साल की जेल और एक करोड़ के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
- परीक्षा कराने वाली एजेंसी अगर पेपर लीक में दोषी हो तो उसके लिए एक करोड़ जुर्माना, परीक्षा की पूरी लागत वसूल करना और अगले 4 साल कोई परीक्षा न करवाने जैसी सजा शामिल है।
- इस कानून के तहत अपराधी पर गैर जमानती धाराएं लगती हैं। मामला समझौते से खत्म नहीं किया जा सकता। केस की जांच DSP या उससे सीनियर अफसर करते हैं
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पेपर लीक संशोधन बिल को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को संसद में पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि यह बिल अब सोमवार 27 जुलाई को ही संसद में पेश किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…


