पठानकोट में शिवसेना नेता पर रिक्शाचालक से ठगी का आरोप: बोला- बेटे से विवाद सुलझाने को लिए 10 हजार पर किया कुछ नहीं, बच्चे के कैंसर के इलाज को चाहिए रुपए – Pathankot News
पठानकोट के विष्णु नगर (लमीनी) में उस समय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई, जब एक गरीब रिक्शा चालक ने शिवसेना लायन के नेता करण पुरी पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित का आरोप है कि नेता ने उसका घरेलू और पारिवारिक विवाद सुलझाने के नाम पर ₹10,000 ऐंठ लिए। इस मामले में पीड़ित ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है, जबकि शिवसेना नेता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी राजनीतिक व सामाजिक छवि को धूमिल करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है। बेटे से विवाद सुलझाने के नाम पर ठगे पैसे पीड़ित रिक्शा चालक गुरमेल राम (गेज्जू) ने मीडिया के सामने बताया कि उनका अपने बेटे के साथ संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। उनके पुराने परिचित और शिवसेना लायन के नेता करण पुरी ने खुद को संगठन का प्रधान बताते हुए इस मामले को सुलझाने का पूरा भरोसा दिया था। गुरमेल का आरोप है कि पुरी ने पुलिस कार्रवाई और वकील की पैरवी का हवाला देकर उनसे ₹15,000 की मांग की। उन्होंने बेहद तंगी के बावजूद किसी तरह ₹10,000 का इंतजाम कर करण पुरी को सौंप दिए। चंडीगढ़ PGI में चल रहा है बच्चे का इलाज, पैसों की सख्त जरूरत पीड़ित गुरमेल राम ने बताया कि बाद में उन्हें पता चला कि उनके मामले में कोई कानूनी या समझौता संबंधी कार्रवाई नहीं की गई है। जब उन्होंने करण पुरी से अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने इनकार कर दिया। पीड़ित ने बताया कि उनके बच्चे का चंडीगढ़ PGI में कैंसर का गंभीर इलाज चल रहा है, जिसे जल्द ही दोबारा अस्पताल ले जाना है। इस नाजुक वक्त में उन्हें पैसों की बेहद सख्त जरूरत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर उनके पैसे वापस दिलाने की गुहार लगाई है करण पुरी का पलटवार: वकील को दिए थे पैसे, रिकॉर्ड मौजूद दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए शिवसेना लायन के नेता करण पुरी ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरमेल राम 35 वर्षों से उनके परिचित हैं और उन्होंने खुद अपने बेटे-बहू के विवाद को सुलझाने के लिए उनसे मदद मांगी थी। पुरी के अनुसार, उन्होंने गुरमेल का मामला पठानकोट जिला अदालत के अधिवक्ता सुमित को सौंपा था। वकील की फीस ₹10,000 तय हुई थी, लेकिन गुरमेल की खराब माली हालत को देखते हुए वकील ₹5,000 में केस लड़ने को तैयार हो गए थे। 9 महीने बाद आरोप लगाने पर उठाए सवाल करण पुरी ने दावा किया कि उन्हें गुरमेल राम से ₹10,000 नहीं, बल्कि केवल ₹2,000 नकद मिले थे, जिसे उन्होंने 13 अक्टूबर 2025 को UPI (डिजिटल पेमेंट) के माध्यम से सीधे अधिवक्ता सुमित के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया था, जिसका पक्का डिजिटल रिकॉर्ड उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि यदि यह घटना अक्टूबर 2025 की है, तो लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद अब जाकर यह आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं? मानहानि का केस करेंगे करण पुरी मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं। मेरे पास वकील को पैसे ट्रांसफर करने के डिजिटल सबूत और अन्य सभी रिकॉर्ड मौजूद हैं। यह सिर्फ समाज में मेरी छवि खराब करने की एक साजिश है। मैं इस झूठे आरोप के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई करूँगा और अदालत का जो भी फैसला होगा, उसे स्वीकार करूँगा।” पुलिस कर रही है मामले की जांच दोनों पक्षों की ओर से किए जा रहे अलग-अलग दावों के बाद अब यह मामला पूरी तरह पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। जहां एक ओर गरीब पीड़ित पिता अपने बच्चे के इलाज के लिए पैसे वापस दिलाने की मांग पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर शिवसेना नेता डिजिटल ट्रांजैक्शन के सबूतों के आधार पर खुद को निर्दोष बता रहे हैं। मामले की असली सच्चाई पुलिस की विस्तृत तफ्तीश के बाद ही सामने आ पाएगी।
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