लुधियाना में अस्पताल द्वारा शव रोकने का केस: मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, सिविल सर्जन से मांगी रिपोर्ट – Ludhiana News

लुधियाना में अस्पताल द्वारा शव रोकने का केस:  मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, सिविल सर्जन से मांगी रिपोर्ट – Ludhiana News




लुधियाना में सड़क हादसे में घायल 22 वर्षीय युवक की मौत के बाद निजी अस्पताल द्वारा करीब आठ घंटे तक शव रोकने के मामले में पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ (यूटी) मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए लुधियाना के सिविल सर्जन से विस्तृत तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तलब की है। यह रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले आयोग में दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को होगी। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने की कार्रवाई
यह कार्रवाई एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सड़क हादसे में घायल युवक की मौत के बाद निजी अस्पताल ने करीब 2.31 लाख रुपए का मेडिकल बिल जमा न होने तक शव परिजनों को नहीं सौंपा। आयोग की पीठ, जिसमें जस्टिस संत प्रकाश, जस्टिस गुरबीर सिंह और पद्मश्री जितेंद्र सिंह शंटी शामिल हैं। उन्होंने ने मामले को गंभीर मानते हुए शिकायत दर्ज की और जांच के आदेश दिए। 13 अप्रैल को हुआ था हादसा
मामले के अनुसार, गांव फुल्लांवाल निवासी 22 वर्षीय बूटा सिंह 13 अप्रैल को गांव गिल के पास सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन उसे इलाज के लिए शेरपुर चौक के नजदीक स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बिल जमा न होने पर शव रोकने का आरोप
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, युवक की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने करीब 2.31 लाख रुपए का बिल जमा कराने की मांग की। आरोप है कि आर्थिक तंगी के कारण परिजन तुरंत रकम का इंतजाम नहीं कर सके और करीब आठ घंटे तक अस्पताल प्रबंधन से शव सौंपने की गुहार लगाते रहे। बताया गया कि लंबी मशक्कत के बाद ही अस्पताल ने शव परिजनों को सौंपा। सिविल सर्जन से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीर मानवाधिकार मुद्दा मानते हुए लुधियाना के सिविल सर्जन को विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले दाखिल की जाए। आयोग ने अपने आदेश की प्रति पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निदेशक को भी भेजी है, ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। 5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को होगी। इस दौरान संबंधित अधिकारी आयोग के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। आयोग की इस पहल के बाद एक बार फिर निजी अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों और उनके परिजनों के साथ व्यवहार, विशेषकर आपातकालीन उपचार और मृत्यु के बाद की औपचारिकताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।



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