संगरूर में सीवरेज भराव पर भड़के लोग: बोले- घरों के सामने भरे गंदे पानी से हो रहे बीमार, विधायक वादा किया, फिर देखने भी नहीं आईं – Sangrur News

संगरूर में सीवरेज भराव पर भड़के लोग:  बोले- घरों के सामने भरे गंदे पानी से हो रहे बीमार, विधायक वादा किया, फिर देखने भी नहीं आईं – Sangrur News




संगरूर की हरिपुरा बस्ती में सीवरेज केI गंदे पानी की निकासी न होने से परेशान निवासियों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। लंबे समय से इस नारकीय स्थिति को झेल रहे मोहल्ला वासियों ने एकत्रित होकर प्रशासन और स्थानीय विधायक के खिलाफ जोरदार रोष प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनका जीना दूभर हो चुका है, लेकिन न तो प्रशासन और न ही जन प्रतिनिधि इस ओर कोई ध्यान दे रहे हैं। लोगों ने प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया और जिम्मेदार विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस सीवरेज संकट का तुरंत और स्थायी समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द ही गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था सुचारू नहीं की गई, तो वे अपने घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर उतरेंगे और इस आंदोलन को और उग्र रूप देने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। बीमारियों का खतरा और आवागमन ठप प्रदर्शनकारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि गलियों में हर समय सीवरेज का बदबूदार और गंदा पानी जमा रहता है। इस वजह से लोगों का घरों से बाहर निकलना और गलियों से गुजरना बेहद मुश्किल हो गया है। चारों ओर फैली गंदगी और सड़ांध के कारण पूरे इलाके में महामारी और गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बच्चे और बुजुर्ग इस दूषित माहौल के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। “चुनाव से पहले स्कूटी पर घूमकर किए थे वादे, अब सुध लेने को तैयार नहीं विधायक” प्रदर्शन के दौरान लोगों का गुस्सा संगरूर की विधायक नरेंद्र कौर के खिलाफ जमकर फूटा। लोगों ने विधायक पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से पहले विधायक साहिबा स्कूटी पर घूम-घूमकर वोट मांगती थीं और वादा करती थीं कि सीवरेज व पीने के पानी जैसी हर समस्या का तुरंत समाधान किया जाएगा। लेकिन, चुनाव जीतने और विधायक बनने के बाद आज तक उन्होंने कभी इस मोहल्ले का रुख नहीं किया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने विधायक और संबंधित विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें भेजीं, लेकिन उनकी चीख-पुकार को हर बार अनसुना कर दिया गया।



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