चक्की दरिया में डी-सिल्टिंग के नाम पर माइनिंग के आरोप: बिना पर्यावरण मंजूरी के करोड़ों की माइनिंग मामले में हाईकोर्ट सख्त, डीसी से मांगी स्टेटस रिपोर्ट – Pathankot News
पठानकोट के वार्ड नंबर 12 में स्थित चक्की दरिया में माइनिंग विभाग पर डी-सिल्टिंग और बाढ़ से बचाव के नाम पर बड़े स्तर पर माइनिंग करवाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जिसको लेकर बेदी बजरी कंपनी एरिया के निवासियों और पूर्व पार्षद द्वारा पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पीआईएल भी दाखिल की गई। जिसमें डीसिल्टिंग की आड़ में सरेआम अवैध खनन करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
अब इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पठानकोट की डिप्टी कमिश्नर से मौके की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। वहीं, जिला लीगल सर्विस अथॉरिटी पठानकोट के सचिव को भी मौके पर जाकर सच्चाई जानने को कहा गया है। हाईकोर्ट के कड़े तेवर, 22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
इलाका निवासियों द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की ओर से कड़े आदेश जारी किए गए हैं। अदालत ने पठानकोट के डिप्टी कमिश्नर को खुद मौके की स्थिति की गहन जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला लीगल सर्विस अथॉरिटी पठानकोट के सचिव को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके का दौरा कर सच्चाई देखें। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई अब 22 जुलाई निर्धारित की गई है। बिना EC हाईवे कंपनी को करोड़ों का मेटीरियल बेचने के आरोप
बता दें, बेदी बजरी कंपनी के पास चक्की दरिया से दिन-रात जेसीबी मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर रेत, बजरी और मिट्टी निकाली जा रही थी। माइनिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मैटीरियल दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस-वे का निर्माण कर रही ठेका कंपनी मेघा इंजीनियरिंग को बेचा गया है।
इसके लिए विभाग ने कंपनी से करीब 2.70 करोड़ रुपए तक का राजस्व वसूल कर मिट्टी उठाने की अनुमति दी है। हालांकि, सबसे विवाद यह है कि इतने बड़े स्तर पर कमर्शियल माइनिंग करने के बावजूद इसके लिए अनिवार्य इन्वायर्मेंट क्लीयरेंस नहीं ली गई है। रोजाना 100 ट्रक मैटीरियल उठा, सादी कॉपी पर दर्ज रिकॉर्ड
चक्की दरिया के किनारे पर स्थित प्राकृतिक टीलों को जेसीबी मशीनों से काटकर ट्रालों में लोड किया जा रहा था, जिससे दरिया की यथास्थिति पूरी तरह बदल रही है। मौके पर 5 जेसीबी मशीनें माइनिंग के काम में जुटी हुई थीं और रोजाना करीब 100 ट्रक माइनिंग मैटीरियल लोड कर बाहर भेजा जा रहा था।
महज एक हफ्ते के भीतर ही दरिया से लगभग 700 से 1000 ट्रक मैटीरियल निकाला जा चुका था। इस पूरी प्रक्रिया की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर मौजूद माइनिंग विभाग का एक कर्मचारी किसी सरकारी रजिस्टर के बजाय, एक कच्ची सादी कॉपी पर वहां से निकलने वाले ट्रकों की डिटेल नोट कर रहा था। विभाग के तर्क को लोगों ने किया खारिज
इस माइनिंग को लेकर जब माइनिंग विभाग के एक्सईएन प्रीत सिमर संधू से बात की गई, तो उन्होंने दलील दी कि बाढ़ की स्थिति में पानी का फ्लो तेज बना रहे, इसलिए हाईवे अथॉरिटी को मिट्टी उठाने की अनुमति दी गई है और विभाग इससे रॉयल्टी वसूल रहा है। विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि नेशनल प्रोजेक्ट में मैटीरियल देने पर एनवायरनमेंट क्लीयरेंस से छूट मिलती है。 दूसरी तरफ, पूर्व पार्षद योगेश ठाकुर ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में रिवर बेल्ट से माल उठाने से पहले इन्वायर्मेंट क्लीयरेंस लेना बेहद जरूरी है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का सवाल है कि जिस ठेका कंपनी को यह मैटीरियल दिया जा रहा है वह पूरी तरह से कमर्शियल है, इसलिए इस पर नियमों की अनदेखी कर छूट नहीं दी जा सकती। रिट पटीशन में क्या थी शिकायत
पठानकोट के मामून और भदरोया गांवों के स्थानीय निवासियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपकर चक्की नदी में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध खनन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के खिलाफ तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की थी।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पिछले करीब डेढ़ महीने से राष्ट्रीय राजमार्ग पुल के पास चक्की नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रूप से खुदाई और खनन का खेल चल रहा है। 2013 के हलफनामे और एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ीं
शिकायत में ऐतिहासिक संदर्भों और न्यायिक आदेशों का हवाला देते हुए बताया गया है कि
2013 का हलफनामा: साल 2013 में तत्कालीन उपायुक्त पठानकोट ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था, जिसके तहत चक्की पुल से 3 किमी अपस्ट्रीम और 1 किमी डाउनस्ट्रीम के दायरे में किसी भी तरह की खुदाई पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया था. पुल टूटने का इतिहास: 2013 में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान चक्की पुल ढह गया था, जिससे भारी तबाही हुई थी. वर्तमान खनन से फिर से उसी प्रकार के जान-माल के नुकसान का खतरा पैदा हो गया है। NGT का आदेश: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने भी आवेदन संख्या 316/2026 के माध्यम से पूरे पंजाब में खुदाई पर रोक लगा रखी है। नियमों के मुताबिक, नेशनल हाईवे से 1 किमी के भीतर कोई खुदाई नहीं हो सकती। करोड़ों के सरकारी फंड की बर्बादी और जनता की सुरक्षा पर खतरा
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने इसी क्षेत्र में नदी के किनारों को सुरक्षित करने और पत्थर के क्रेट लगाने के लिए सार्वजनिक धन का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया था. चल रहा अवैध खनन इन सुरक्षा ढांचों को पूरी तरह कमजोर कर रहा है, जिससे आगामी मानसून और बाढ़ के दौरान आसपास के गांवों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है। यह भी आरोप लगाया गया है कि सिंचाई विभाग गाद निकालने की आड़ में नदी के तल की सामग्री को निजी ठेकेदारों को बेच रहा है। उच्च न्यायालय से ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
गांव के प्रबुद्ध नागरिकों जिनमें सुधीर महाजन, राजेश्वर सिंह, मुकेश्वर सिंह, रणधीर सिंह, रणबीर सिंह आदि शामिल हैं द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में अदालत से निम्नलिखित गुहार लगाई गई है: 1. चक्की राष्ट्रीय राजमार्ग पुल के पास चल रहे अवैध खनन की तुरंत प्रभाव से न्यायिक या स्वतंत्र जांच के आदेश दिए जाएं। 2. जांच लंबित रहने तक प्रतिबंधित क्षेत्र में सभी प्रकार की खुदाई गतिविधियों को तुरंत रुकवाया जाए। 3. पुल और नदी सुरक्षा कार्यों पर खनन के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए। 4. इस मामले में संलिप्त सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि इस गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे पर तुरंत एक्शन नहीं लिया गया, तो इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। इस शिकायत की प्रतियां पंजाब के मुख्यमंत्री, पठानकोट के डिप्टी कमिश्नर और एसएसपी को भी भेजी गई हैं।
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