लुधियाना में वेरका के दूध की क्वालिटी गिरी: डिस्ट्रिब्यूटर का दावा- आधे घंटे में फट रहा दूध, जांच करवाई जाए; CM मान से मिलेंगे – Ludhiana News
पंजाब के सबसे भरोसेमंद और सबसे बड़े डेयरी ब्रांड ‘वेरका’ की क्वालिटी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। वेरका मिल्क की क्वालिटी पर सवाल कोई और नही बल्कि वही लोग उठा रहे हैं जो इस दूध को बेच रहे हैं। लुधियाना वेरका डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि दूध का पैकट आधे घंटे में खराब हो रहे हैं। ग्राहक दूध खराब होने पर वापस ला रहे हैं। एसोसिएशन का तर्क है कि प्लांट में क्वालिटी को लेकर मापदंड सही से नहीं अपनाए जा रहे। एसोसिएशन ने लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दूध की जांच करने की मांग सरकार से रखी है। इसके साथ ही उन्होंने वेरका प्रबंधन पर मनमानी करने का आरोप लगाया जिससे डिस्ट्रीब्यूटर भी काफी परेशान हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन का कहना है कि वे इस ऐतिहासिक ब्रांड को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते नहीं देख सकते। उनका कहना है कि पंजाब का सहकारिता विभाग सीधे मुख्यमंत्री भगवंत मान के अधीन आता है, इसलिए डिस्ट्रीब्यूटर्स ने अब सीधे सूबे के मुखिया की चौखट पर जाने का फैसला किया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री कार्यालय से मुलाकात का समय मांगा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि वे जल्द ही सीएम भगवंत मान से मिलकर लुधियाना प्लांट में चल रही लापरवाही, अधिकारियों की मनमानी और घटिया क्वालिटी का पूरा सच उनके सामने रखेंगे ताकि इसे बचाया जा सके। डिस्ट्रिब्यूटरने गिनाई ये परेशानियां, जानिए.. आधे घंटे में फट रहा दूध: डिस्ट्रीब्यूटर्स का सबसे बड़ा और गंभीर दावा यह है कि लुधियाना प्लांट से जो दूध सप्लाई हो रहा है, उसकी क्वालिटी बेहद घटिया हो चुकी है। दुकानदारों और ग्राहकों तक पहुँचने के महज आधे घंटे के भीतर दूध फट जाता है। रिप्लेसमेंट के लिए चक्कर कटवाना: एसोसिएशन का कहना है कि जब फटा हुआ या खराब दूध वापस करने के लिए प्लांट प्रबंधन से संपर्क किया जाता है, तो अधिकारी डिस्ट्रीब्यूटर्स की एक नहीं सुनते। खराब माल की वापसी के लिए उन्हें हफ्तों चक्कर कटवाए जाते हैं और मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। ओवर-सप्लाई का खेल: डिस्ट्रीब्यूटर्स ने आरोप लगाया कि प्लांट प्रबंधन अपनी कागजी सेल बढ़ाने और टारगेट पूरा करने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स पर जबरन ज्यादा माल थोप रहा है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई डिस्ट्रीब्यूटर अपनी मांग के अनुसार 100 ट्रे माल का ऑर्डर देता है, तो प्लांट से जबरदस्ती 110 ट्रे भेज दी जाती हैं। इस अतिरिक्त माल (ओवर सप्लाई) को बेचने का दबाव डिस्ट्रीब्यूटर्स पर होता है, और यदि वह माल समय पर न बिके और खराब हो जाए, तो उसका पूरा आर्थिक नुकसान भी डिस्ट्रीब्यूटर्स के मत्थे मढ़ दिया जाता है। ग्राहक आकर लड़ते हैं डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि जनता वर्षों से वेरका पर अटूट विश्वास करती आई है, लेकिन अब खराब दूध मिलने के कारण ग्राहकों और फुटकर दुकानदारों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इस पब्लिक आक्रोश का सीधा सामना डिस्ट्रीब्यूटर्स को मार्केट में करना पड़ रहा है, जिससे उनकी साख भी दांव पर लग गई है। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने साफ किया कि इस गंभीर संबंध में लुधियाना प्लांट के उच्च अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अधिकारियों ने पूरी तरह से अपनी आंखें मूंद रखी हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया जा रहा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी का निजी विरोध करना या किसी तरह की राजनीति करना नहीं है। वे कई सालों से इस ब्रांड से जुड़े हैं और वेरका को अपना परिवार मानते हैं, इसलिए वे केवल इसकी पुरानी साख को बचाने के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं।
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