चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी में नहीं होगा फ्रॉड: एक क्लिक पर कर सकेंगे असली मालिक का पता; 30 दिन में आपत्तियां दें वर्ना लागू हो जाएगी स्कीम – Chandigarh News

चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी में नहीं होगा फ्रॉड:  एक क्लिक पर कर सकेंगे असली मालिक का पता; 30 दिन में आपत्तियां दें वर्ना लागू हो जाएगी स्कीम – Chandigarh News


प्रॉपर्टी रिकॉर्ड के लिए सबसे पहले पूरे इलाके का ड्रोन से सर्वे कराया गया।

चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। प्रशासन ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत सेक्टर-2 से 17 (सेक्टर-13 को छोड़कर) कुल 15 सेक्टरों में फील्ड सर्वे का काम पूरा कर लिया। अब अंतिम रिकॉर्ड तैयार करने से पहले लोगों से 30 दिन के भीतर आ

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यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के NAKSHA (नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज बेस्ड लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशंस) प्रोजेक्ट के तहत हो रही है। इसका उद्देश्य शहरों की हर संपत्ति का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना, मालिकाना हक स्पष्ट करना और प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों को कम करना है।

इसके तहत सबसे पहले पूरे इलाके का ड्रोन से सर्वे कराया गया। इसके बाद आधुनिक तकनीक, जीएनएसएस और रोवर जैसे उपकरणों की मदद से मकानों, प्लॉटों, सरकारी इमारतों, सड़कों, पार्कों और खाली जमीन की मौके पर सटीक पैमाइश की गई। इसी आधार पर डिजिटल नक्शे और प्रॉपर्टी रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं।

अगर किसी संपत्ति का रिकॉर्ड नहीं मिला तो क्या होगा?

यदि किसी संपत्ति का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध नहीं है, तो मालिक के वैध दस्तावेजों के आधार पर उसका स्वामित्व तय किया जाएगा और उसे प्रॉपर्टी रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। सर्वे के आधार पर तैयार नक्शे लोगों के लिए सार्वजनिक किए गए हैं, ताकि कोई आपत्ति होने पर उसे निर्धारित समय के भीतर दर्ज कराया जा सके।

आपत्तियों के निपटारे के बाद रिकॉर्ड को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद हर जमीन के टुकड़े को यूनिक आईडी दी जाएगी, जिससे भविष्य में रिकॉर्ड को अपडेट करना और उसकी जानकारी प्राप्त करना आसान होगा।

आपत्तियां कहां और किस माध्यम से दर्ज होंगी?

एतराज 30 दिनों में दर्ज होंगे।दावा या आपत्ति एस्टेट ऑफिस, चंडीगढ़ के Know Your Property पोर्टल पर उपलब्ध NAKSHA लिंक के माध्यम से दर्ज की जा सकती है। दावा/आपत्ति के साथ आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। लोग इसी पोर्टल पर NAKSHA लिंक के जरिए अपनी संपत्ति का रिकॉर्ड और डिजिटल नक्शा देख सकते हैं।

30 दिन में आपत्ति नहीं दी, तो रिकॉर्ड में सुधार होगा क्या?

विभाग की तरफ से अभी इस बारे में जानकारी नहीं दी। 30 दिन की अवधि ड्राफ्ट रिकॉर्ड पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए दी गई है। इसके बाद सुधार या अपील की प्रक्रिया के बारे में यूटी प्रशासन ने अलग से कोई सार्वजनिक दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं।

यूनिक प्रॉपर्टी आईडी का उपयोग किन-किन कामों में होगा?

इस सार्वजनिक सूचना में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी के उपयोग का विवरण नहीं दिया गया है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्रॉपर्टी रिकॉर्ड तैयार करना है, लेकिन इसे रजिस्ट्री, टैक्स और म्यूटेशन से कब और कैसे जोड़ा जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी जारी नहीं हुई है। यह केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट है। जिसमें पहले चरण में 150 शहरों का कवर किया जा रहा है।

क्या इस प्रोजेक्ट से प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री में बदलाव आएगा? नहीं, लेकिन प्रॉपर्टी का सही मालिक आदि लोग आसानी से जान पाएंगे। हालांकि पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे चंडीगढ़ और गांवों में इसे लागू करने को लेकर अभी कोई आधिकारिक समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।

2 पॉइंट में प्रोजेक्ट के बारे में जानिए

  • क्या है NAKSHA प्रोजेक्ट: चंडीगढ़ में जमीन और संपत्तियों के रिकॉर्ड को आधुनिक और पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) की ओर से NAKSHA (नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज बेस्ड लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशंस) प्रोजेक्ट चलाया गया है। यह सर्वे चंडीगढ़ प्रशासन ने सर्वे ऑफ इंडिया (SOI), नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) और नगर निगम चंडीगढ़ (MCC) के सहयोग से कराया है। इसके लिए प्रशासन ने 20 विशेष फील्ड टीमों का गठन किया था, जिन्होंने मौके पर जाकर संपत्तियों का भौतिक सत्यापन किया।
  • पूरे शहर में चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार: प्रशासन के अनुसार पायलट चरण में ड्रोन सर्वे, जीआईएस मैपिंग और डेटा सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है। इसके बाद ‘अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे। पायलट परियोजना के सफल होने पर चरणबद्ध तरीके से पूरे चंडीगढ़ और शेष गांवों को भी NAKSHA प्रोजेक्ट के दायरे में लाया जाएगा। हालांकि, इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए अलग से कोई बजट या लागत सार्वजनिक नहीं की गई है।

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