मोगा में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत: नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट मामलों का निपटारा, निहाल सिंह वाला व बाघापुराना कोर्ट में आयोजन – Moga News
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 (जैसे चेक बाउंस आदि) से संबंधित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए आगामी 18 जुलाई 2026 को मोगा जिले में एक विशेष लोक अ
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मोगा जिले और आसपास के आम नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि वे अदालतों के चक्कर काटने के बजाय आगे आएं और अपने समझौतायोग्य मामलों को इस विशेष लोक अदालत में रखकर इस कल्याणकारी कानूनी व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
यह विशेष लोक अदालत जिला मुख्यालय मोगा के साथ-साथ उप-मंडल स्तर पर निहाल सिंह वाला और बाघापुराना की अदालतों में भी एक साथ आयोजित की जाएगी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मोगा, नीलम अरोड़ा ने इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा की है। आपसी समझौते से विवादों को सुलझाने पर रहेगा ध्यान
न्यायाधीश नीलम अरोड़ा ने बताया कि इस विशेष लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 से संबंधित समझौतायोग्य (Compounded) मामलों की सुनवाई करना और दोनों पक्षों की आपसी सहमति व समझौते के माध्यम से विवादों का हमेशा के लिए समाधान कराना है।
समय और पैसे की बचत, खत्म होगी आपसी कटुता
इस संबंध में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (मोगा) सिमरन सिंह ने लोक अदालत के फायदों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से आम जनता को बहुत कम समय में और बिना किसी मानसिक परेशानी के त्वरित न्याय मिलता है।
इससे न केवल उनके कीमती समय की बचत होती है, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाले भारी-भरकम धन के खर्च से भी राहत मिलती है। सिमरन सिंह ने आगे बताया कि लोक अदालत में जब किसी मामले का निपटारा होता है, तो दोनों पक्षों के बीच चल रही पुरानी कड़वाहट और दुश्मनी हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है और उनके बीच सौहार्द बढ़ता है।
लोक अदालत के फैसले के बड़े फायदे:
पूरी कोर्ट फीस वापसी: यदि कोई मामला लोक अदालत के माध्यम से सुलझा लिया जाता है, तो कानूनन उस मामले में संबंधित पक्ष द्वारा जमा की गई पूरी कोर्ट फीस (Court Fees) वापस कर दी जाती है।
अंतिम फैसला (कोई अपील नहीं): लोक अदालत के फैसले को दीवानी न्यायालय (Civil Court) की डिक्री के समान कानूनी मान्यता प्राप्त होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके फैसले के खिलाफ किसी भी उच्च न्यायालय (High Court) में अपील दर्ज नहीं की जा सकती, जिससे मामला हमेशा के लिए बंद हो जाता है।

