मोगा में पेड़ में उतरा करंट, दो की ली जान: गर्मी से बचने को छांव में बैठे, हाई टेंशन लाइन से हादसा, एक की कुछ दिन पहले हुई थी शादी – Moga News
मोगा जिले के अंतर्गत आते गांव राऊके में बिजली करंट की चपेट में आने से दो सगे दोस्तों की मौत होने का एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। यह दर्दनाक हादसा मानूके वाली नहर के पास एक पेड़ के नीचे घटित हुआ, जहाँ ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज बिजली की तार
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पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृतकों की पहचान गांव राऊके के रहने वाले 27 वर्षीय अमृतपाल सिंह और 32 वर्षीय सुखप्रीत सिंह के रूप में हुई है। इस भीषण हादसे के बाद पूरे गांव में गहरा शोक और रोष का माहौल है।
फीडर आन करने गए थे, गर्मी से बचने के लिए छांव में बैठे थे
थाना निहाल सिंह वाला एसएचओ इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह ने बताया कि दोनों युवक नहर के पास लगे बिजली फीडर को चलाने के लिए गए थे। फीडर ऑन करने के बाद भीषण गर्मी से बचने के लिए दोनों नहर के पुल पर बने एक घने पेड़ की छांव के नीचे बैठ गए।
इसी दौरान अचानक पेड़ के ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज बिजली की नंगी तारें हवा या किसी अन्य कारण से पेड़ की टहनियों से छू गईं। देखते ही देखते पूरे पेड़ में हाई वोल्टेज करंट दौड़ गया और नीचे बैठे दोनों युवक इसकी चपेट में आ गए।
कुछ समय पहले ही हुई थी अमृतपाल की शादी
गांव के प्रधान बूटा सिंह ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए बताया कि दोनों युवक बेहद मिलनसार और मेहनती थे। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि मृतक अमृतपाल सिंह की शादी कुछ समय पहले ही हुई थी और उसके पूरे जीवन के सपने अभी बाकी थे। इस दोहरी मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और हर घर में चूल्हा तक नहीं जला।
शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जांच जारी
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोगा के सिविल अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। मामले की आगे की तफ्तीश कर रहे सहायक थानेदार वरिंदर कुमार ने बताया कि पारिवारिक सदस्यों के अधिकारिक बयान दर्ज करने के बाद कानून के अनुसरा तहत कार्रवाई की जाएगी और पोस्टमार्टम के बाद शव वारिसों को सौंप दिए जाएंगे।
गांव के प्रधान बूटा सिंह सहित समूह ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पंजाब सरकार से पुरजोर अपील की है कि पीड़ित परिवारों की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत उचित सरकारी मुआवजा और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि इन बेसहारा हो चुके परिवारों को कुछ संबल मिल सके।

