जसवंत सिंह खालड़ा के हत्यारे DSP को ढूंढने के आदेश: नाभा ओपन जेल ने होशियारपुर पुलिस को दिए निर्देश, निजी बॉन्ड पर किया था रिहा – Patiala News

जसवंत सिंह खालड़ा के हत्यारे DSP को ढूंढने के आदेश:  नाभा ओपन जेल ने होशियारपुर पुलिस को दिए निर्देश, निजी बॉन्ड पर किया था रिहा – Patiala News




फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के कत्ल का मामला एक बार फिर गरमा गया है। अब नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल प्रशासन ने होशियारपुर पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी पूर्व डीएसपी (DSP) जशपाल सिंह का अता-पता लगाने के निर्देश दिए हैं। होशियारपुर थाना सदर ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें पूर्व डीएसपी को ढूंढने के लिए कहा गया है। दरअसल, जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह को मई 2023 में नाभा ओपन एग्रीकल्चर जेल से 1 लाख रुपये के निजी बॉन्ड पर जमानत पर रिहा किया गया था। सितंबर 2022 में पंजाब सरकार ने जसपाल सिंह की समय से पहले सजा माफी का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा था। यह प्रस्ताव अभी भी राज्यपाल के पास पेंडिंग पड़ा है। एग्रीकल्चर जेल नाभा ने होशियारपुर पुलिस को जल्दी से जल्दी उसका पता लगाने को कहा है। हाई कोर्ट के इस नियम के आधार पर मिली थी जमानत एक सीनियर जेल अधिकारी के मुताबिक, सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल की तरफ से लंबे समय तक कोई फैसला नहीं लिया गया। हाई कोर्ट के एक पुराने आदेश (COCP नंबर 2020/2022) के अनुसार, यदि सरकार के सजा माफी के प्रस्ताव पर राज्यपाल 3 महीने तक कोई फैसला नहीं लेते हैं, तो अंतिम फैसला आने तक कैदी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। इसी नियम के आधार पर पटियाला की सीजेएम (CJM) नवदीप कौर गिल ने जसपाल सिंह को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे। 2019 में तत्कालीन राज्यपाल ने खारिज की थी अर्जी जसपाल सिंह को हाई कोर्ट से पैरोल मिली थी, लेकिन टांडा के एक अन्य मामले (FIR 81/1996) में 5 साल की सजा के चलते जेल प्रशासन ने उसे अंदर ही रखा। इसके खिलाफ उसने ‘हेबियस कॉर्पस याचिका लगाई, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। तत्कालीन राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की आपत्ति के बाद जसपाल सिंह की सजा माफी की अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उसकी उम्रकैद की सजा दोबारा शुरू हो गई थी। कोरोना काल और सरेंडर कोरोना महामारी के दौरान उसे फिर पैरोल मिली। 2021 में उसने दोबारा हाई कोर्ट में अपील की, लेकिन अगस्त 2022 में केस वापस ले लिया। कोर्ट ने उसे 16 अगस्त 2022 तक सरेंडर करने को कहा था। बता दें कि जसपाल सिंह ने अपनी अधिकांश सजा ओपन जेल में ही काटी है। क्या था जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड? साल 1995 में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा को अगवा कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में 2005 में पटियाला की सीबीआई (CBI) कोर्ट ने डीएसपी जसपाल सिंह और एएसआई अमरजीत सिंह को उम्रकैद और चार अन्य पुलिसकर्मियों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एएसआई अमरजीत सिंह को बरी कर दिया था, जबकि बाकी चार पुलिसकर्मियों (सुरिंदरपाल सिंह, जसबीर सिंह, सतनाम सिंह और पृथ्वीपाल सिंह) की सजा को 7 साल से बढ़ाकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।



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