बिना सरकारी मदद के चल रही हैं शहर की दो गौशालाएं, नगर निगम हर साल चार करोड़ रुपए तक काऊ सेस वसूल रहा – Jalandhar News
हेमंत | जालंधर नगर निगम शहर की सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं को संभालने में नाकाम है, जनता से हर मोड़ पर ‘काऊ सेस’ भी वसूला जा रहा है, लेकिन जालंधर के गोवंश का पेट सरकार नहीं, बल्कि शहरवासियों की ग्रह दोष कम करने वाली आस्था भर रही है। शहर की दो प्रमुख गौशालाओं में रोज करीब 2500 लोग पहुंच रहे हैं। कोई अपनी कुंडली का ‘ग्रह दोष’ शांत करने आता है, तो कोई मूक पशुओं की सेवा के लिए। नतीजा- बिना किसी सरकारी इमदाद के, केवल जन-सहयोग से रोज क्विंटल के हिसाब से चारे का इंतजाम हो रहा है। वहीं, जालंधर नगर निगम हर साल औसतन 3.67 करोड़ से 4 करोड़ का टोटल काऊ सेस अपने बजट खातों में सीधे दिखाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित गौतम भार्गव के मुताबिक, महानगरीय लाइफस्टाइल में घर पर गाय रखना मुमकिन नहीं है, इसलिए लोग गौशालाओं को अपना केंद्र बना रहे हैं। ग्रहों की शांति के लिए किया जाने वाला यह निवेश, असल में इन बेसहारा पशुओं के लिए लाइफ-लाइन बन चुका है। ‘गौशाला पिंजरापोल’ (टांडा रोड) ने अपने सफर के 90 साल पूरे कर लिए हैं। प्रबंधक संदीप थापर बताते हैं कि शुरुआत सिर्फ 20 गायों से हुई थी। तब यह जगह इतनी नीची थी कि बरसात में दलदल बन जाती थी। इसे ठीक करने का जिम्मा सेवादारों ने खुद उठाया। यहां मिट्टी ढोकर इसे ऊंचा किया। आज यहां 500 से ज्यादा गाएं हैं। इनके लिए रोज सब्जी मंडी से 200 क्विंटल चारा खरीदा जाता है। सरकार से कोई मदद नहीं। पूरा खर्च श्रद्धालुओं के गुप्त दान और दूध की बिक्री से निकलता है। आम दिनों में 500 और त्योहारों पर 2 हजार से ज्यादा लोग यहां माथा टेकने आते हैं। ज्योतिष शास्त्र में गाय की पीठ पर मौजूद कूबड़ को ‘सूर्य केतु नाड़ी’ माना गया है। नवग्रहों के दोष दूर करने के लिए विद्वानों ने यह आसान फॉर्मूला बताया है: सूर्य और चंद्रमा (मान-सम्मान व मानसिक शांति): गाय की पीठ सहलाने से सूर्य मजबूत होता है। गाय को निहारने और उसकी सेवा से चंद्रमा बलवान होता है, जिससे डिप्रेशन दूर होता है। बुध (बिजनेस और बुद्धि): बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं। इससे व्यापार की रुकावटें दूर होती हैं। बृहस्पति (शादी और करियर): गुरुवार को गाय को हल्दी लगी रोटी या चने की दाल के साथ गुड़ खिलाएं। विवाह के योग जल्दी बनेंगे। मंगल और शुक्र (वैभव और सुख): मंगलवार को गुड़ खिलाने से कर्ज से मुक्ति मिलती है। शुक्रवार को घी-चीनी लगी रोटी खिलाने से सुख-समृद्धि आती है। शनि-राहु और केतु (क्रूर दृष्टि से बचाव): शनिवार को काली गाय को तेल चुपड़ी रोटी या बूंदी के लड्डू खिलाएं। रोज सुबह की पहली रोटी (गौ-ग्रास) निकालने से पितृदोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव खत्म होते हैं। नगर निगम तीन गौशाला में पशुओं को डाइट के पैसे का भुगतान करता है। इसमें 32 रुपए प्रति पशु के हिसाब से करतारपुर पिंजरा पोल और फरीदकोट गौशालाओं को भुगतान किया जाता है। भुगतान से पहले गौशाला में पशुओं का वेरिफिकेशन भी किया जाता है। -कृष्णा शर्मा, हेल्थ अफसर वर्कशॉप चौक के पास स्थित अपाहिज आश्रम सिर्फ बेसहारा बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि 150 मूक गोवंश को भी आसरा दे रहा है। आश्रम के चेयरमैन तरसेम कपूर ने बताया कि लोगों के सहयोग के साथ यहां पूरी तरह आधुनिक गौशाला बनाई गई है। गायों की 24 घंटे देखभाल के लिए 9 पक्के सेवादार रखे गए हैं। रोज औसतन 250 लोग यहां हरा चारा, चोकर और गुड़ लेकर पहुंचते हैं। यहां आने वाले लोग दिखावे के बजाय गुप्त दान को तरजीह देते हैं, जिससे इस आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च निकलता है।
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