चंडीगढ़ कैशियर मर्डर: 11-12 जून को रैकी: पुलिस को भनक नहीं ; शूटर आप्रेशन सेल-क्राइम बांच ने पकडे, रिमांड थाना पुलिस को – Chandigarh News

चंडीगढ़ कैशियर मर्डर: 11-12 जून को रैकी:  पुलिस को भनक नहीं ; शूटर आप्रेशन सेल-क्राइम बांच ने पकडे, रिमांड थाना पुलिस को – Chandigarh News




चंडीगढ़स सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकी दास की हत्या के मामले में अब चंडीगढ़ पुलिस की खुफिया व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि वारदात से पहले शूटरों ने दो दिन रेकी की, लेकिन एरिया थाना पुलिस और सीआईडी को इसकी भनक तक नहीं लगी। ऑपरेशन सेल की जांच के अनुसार, आरोपी 11 और 12 जून को सेक्टर-11 में मौजूद रहे और मेडिकल स्टोर के आसपास लगातार रेकी करते रहे। पहले कुमार ब्रदर्स फिर श्री कुमार मेडिकल स्टोर पुलिस जांच में पता चला है कि 13 जून को वारदात से पहले आरोपी सबसे पहले कुमार ब्रदर्स की दुकान पर गए थे। वहां काउंटर पर उन्हें वह व्यक्ति नहीं मिला, जिसकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद वे श्री कुमार मेडिकल स्टोर पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, शूटरों को बताया गया था कि उनका निशाना ऐसा व्यक्ति है, जिसका शरीर भारी है और सिर पर बाल कम हैं। हालांकि अब तक चंडीगढ़ पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि शूटरों का असली निशाना श्री कुमार मेडिकल स्टोर था या फिर कुमार ब्रदर्स। पहले भी मिल चुकी गैंगस्टरों की धमकियां सेक्टर-11 स्थित कुमार ब्रदर्स का नाम पहली बार किसी आपराधिक मामले में सामने नहीं आया है। इसे पहले भी गैंगस्टरों की ओर से धमकियां मिल चुकी थीं। धमकियों की जानकारी पुलिस तक भी पहुंची थी और मामले को गंभीर माना गया था।इसके बावजूद दुकान और आसपास के क्षेत्र में कोई पुख्ता सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। जानकारी के मुताबिक, धमकियां मिलने के बाद कुछ समय तक पुलिस की ओर से निगरानी और गश्त जरूर बढ़ाई गई, लेकिन बाद में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य कर दी गई। इस बीच आरोपियों ने कई बार चंडीगढ़ आकर इलाके की रेकी की। जांच में सामने आया है कि शूटर मई में भी शहर आए थे और एक होटल में ठहरकर इलाके का जायजा लेने के बाद लौट गए। इसके बाद 11 और 12 जून को दोबारा सेक्टर-11 पहुंचकर मेडिकल स्टोर और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी। बावजूद इसके पुलिस की इंटेलिजेंस और स्थानीय निगरानी व्यवस्था को इसकी भनक तक नहीं लगी। 13 जून को वारदात वाले दिन भी आरोपी पहले कुमार ब्रदर्स की दुकान पर पहुंचे। वहां काउंटर पर उन्हें वह व्यक्ति नहीं मिला, जिसकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद वे श्री कुमार मेडिकल स्टोर पहुंचे, जहां कैशियर जानकी दास की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या आरोपियों का असली निशाना कुमार ब्रदर्स था या श्री कुमार मेडिकल स्टोर। इस पर अभी तक पुलिस ने कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। ऑपरेशन सेल और क्राइम ब्रांच ने पकड़े आरोपी कैशियर जानकी दास की हत्या के बाद चंडीगढ़ पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुट गई थीं। जांच के दौरान ऑपरेशन सेल और क्राइम ब्रांच को अहम सुराग मिले। इसके बाद ऑपरेशन सेल के इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों और क्राइम ब्रांच के प्रभारी इंस्पेक्टर नरेंद्र पटियाल की अगुवाई में पुलिस टीम ने जम्मू में दबिश देकर दोनों शूटर सनी मेहरा और आर्यन को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को चंडीगढ़ लाकर उनसे लगातार पूछताछ की गई। पूछताछ में पुलिस को वारदात की साजिश, रेकी, भागने के रास्ते और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों के बारे में कई अहम जानकारियां मिली हैं। और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी थी। थाना पुलिस के रिमांड पर उठे सवाल पुलिस विभाग में इस समय एक और मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार, इस हत्याकांड की जांच में ऑपरेशन सेल और क्राइम ब्रांच की टीम ने अहम भूमिका निभाई। दोनों यूनिट ने तकनीकी जांच और लगातार छापेमारी के बाद जम्मू से दोनों शूटरों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान इन्हीं टीमों को मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग और जानकारियां भी मिलीं। इसके बावजूद, अब मुख्य आरोपी अमित का प्रोडक्शन वारंट लेकर उसका पुलिस रिमांड थाना पुलिस को दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। चंडीगढ़ पुलिस के ज्यादातर सभी विभाग चर्चा है कि जिस टीम ने पूरे मामले का खुलासा किया और आरोपियों तक पहुंची, आगे की पूछताछ भी उसी टीम को करनी चाहिए थी। इससे जांच में मिली जानकारियों को जोड़ने और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में आसानी होती। सूत्रों का यह भी कहना है कि वारदात के दिन शहर में जगह-जगह पुलिस नाके लगे हुए थे, लेकिन इसके बावजूद शूटर चंडीगढ़ से फरार हो गए। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में यह सुरक्षा चूक हुई, उसी थाना पुलिस को दोबारा मुख्य आरोपी का रिमांड क्यों सौंपा गया। पुलिस विभाग के अंदर इस फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कि यदि ऑपरेशन सेल और क्राइम ब्रांच को ही आगे की पूछताछ की जिम्मेदारी दी जाती, तो मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे गैंग के नेटवर्क तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को और मदद मिल सकती थी। जानिए, कत्ल से पहले कब आए शूटर, किस-किस होटल में ठहरे 9 मई को हिमाचल होटल आए, एक रात रुके: पुलिस जांच के मुताबिक श्रीकुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकीदास के कत्ल की प्लानिंग मई महीने से ही चल रही थी। इसकी रेकी करने के लिए शूटर पहली बार 9 मई को चंडीगढ़ पहुंचे। यहां सुबह करीब 4:55 बजे कजहेड़ी स्थित हिमाचल होटल पहुंचे थे। होटल रिकॉर्ड के अनुसार उस समय राहुल, सनी मेहरा, ईशान और अमन नामक चार युवक वहां रुके थे। अगले दिन 10 मई को सुबह 7:40 बजे वे होटल छोड़कर चले गए। उन्होंने एक दिन का किराया 1000 रुपए अदा किया था। 10 जून को फिर इसी होटल में आए, 3 दिन रुके: इसके बाद इसके बाद 10 जून को सुबह करीब 4:30 बजे के आसपास आरोपी दोबारा हिमाचल होटल पहुंचे। इस बार होटल रिकॉर्ड में सनी मेहरा, आर्यन शर्मा, अमन सिंह और मानस के नाम दर्ज बताए जा रहे हैं। ये तीन दिन तक होटल में रुके और 12 जून को दोपहर करीब 2 बजे चेकआउट कर गए। उन्होंने होटल का लगभग 3000 रुपए किराया चुकाया। चौथे दिन अमर होटल में चले गए: हिमाचल होटल छोड़ने के बाद आरोपी सीधे नजदीक स्थित अमर होटल पहुंचे। वहां उन्होंने दोपहर करीब ढाई बजे कमरा लिया और रात वहीं रुके। अगले दिन 13 जून को दोपहर 12:55 बजे उन्होंने अमर होटल से चेकआउट किया और करीब 800 रुपए का भुगतान किया। अमर होटल से चेकआउट करने के बाद कत्ल किया: अमर होटल से निकलने के कुछ समय बाद ही आरोपियों ने सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल स्टोर के कैशियर जानकीदास पर गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद भी आरोपी करीब 50 मिनट तक शहर में मौजूद रहे, लेकिन पुलिस उन्हें मौके पर नहीं पकड़ सकी। बाद में वे चंडीगढ़ से फरार हो गए।



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