झारसुगुड़ा में पति बाइक पर बांधकर लाया पत्नी का शव: परिजन का आरोप- स्वास्थ्य केंद्र ने घंटों इंतजार करवाया, न शव वाहन दिया, न एंबुलेंस
झारसुगुड़ा13 मिनट पहले
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ओडिशा के झारसुगुड़ा में एक व्यक्ति पत्नी के शव को बाइक पर लाने मजबूर हो गया। लाइकेरा ब्लॉक के उडियापाली गांव में रहने वाले नरेश छत्रिया की पत्नी जमुना की मौत मुद्रजोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हो गई थी।
नरेश जमुना की तबीयत बिगड़ने पर उसे डॉक्टर के पास ले गया था। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नरेश ने शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी। लेकिन काफी इंतजार के बाद भी उसे शव वाहन नहीं मिला।
मजबूरन नरेश, अपने पड़ोसी की बाइक पर पत्नी के शव को रखकर घर लेकर आया। मुंद्राजोर CHC से लेकर ओडियापाली गांव की दूरी लगभग 5 किमी है।
शनिवार 4 जुलाई को हुए इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें नरेश पत्नी के शरीर को चादर से ढंककर बाइक पर लेकर जाता दिख रहा है।
पहले देखिए इस घटना की एक तस्वीर…

नरेश जिस बाइक पर पत्नी का शव लाया, वह भी पड़ोसी की है।
नरेश ने पत्नी का पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया, कहा- समाज को बड़ा भोज देना पड़ता
ओडिशा की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि नरेश ने एंबुलेंस या शव वाहन आने का इंतजार ही नहीं किया। उसे डर था कि डॉक्टर उसकी पत्नी के शव का पोस्टमॉर्टम कर देंगे। अगर ऐसा होता तो उसे सामाजिक बहिष्कार और पूरे समाज को बड़ा भोज देना पड़ता। इसी डर से वह शव को बाइक पर ही घर ले आया।
CDMO बोले- शव वाहन का इंतजाम हो रहा था, परिवार नहीं रुका
झारसुगुड़ा के CDMO डॉ. शक्ति प्रसाद पाधी ने कहा कि मुंद्राजोर CHC में स्थायी शववाहन नहीं है। उनके अनुसार दूसरी जगह से वाहन की व्यवस्था की जा रही थी, लेकिन परिजन पोस्टमार्टम से इनकार करते हुए लिखित अंडरटेकिंग देकर शव अपने साथ ले गए। पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और यदि किसी चिकित्सक या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लोग बोले- दाना माझी की याद ताजा हो गई

नरेश छत्रिया की घटना को देखकर इसकी तुलना दाना माझी की घटना से की जा रही है। दरअसल आज से ठीक 10 साल पहले अगस्त 2016 में ओडिशा के कालाहांडी में दाना माझी अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठाकर 10 किमी तक पैदल चले थे। उनके साथ छोटी सी बेटी भी थी।
इस घटना की तस्वीरें और वीडियो पूरे देश में वायरल हो गए। इसे गरीबी, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और शव-वाहन व्यवस्था की विफलता बताया गया था।
घटना के बाद ओडिशा सरकार ने जांच के आदेश दिए। शव-परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए महाप्रयाण योजना जैसी मुफ्त शव-वाहन सेवाएं भी शुरू की गई थीं।
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