पठानकोट में फिर हड़ताल पर गए PSPCL कर्मचारी: वायदाखिलाफी से नाराज कच्चे कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, अनिश्चितकालीन धरना शुरू – Pathankot News
पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के कच्चे कर्मचारियों और पंजाब सरकार के बीच टकराव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद मांगें पूरी न होने से गुस्साए बिजली विभाग के कच्चे कर्मचारियों ने पठानकोट में दोबारा मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि इस बार वे केवल बातों से नहीं मानेंगे। जब तक उनकी सभी मांगों को लिखित रूप में मंजूर कर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं की जाती, तब तक उनका यह संघर्ष और धरना-प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा। मलिकपुर बिजली कार्यालय बना आंदोलन का केंद्र बता दें, कर्मचारियों के इस आंदोलन का मुख्य केंद्र एक बार फिर पठानकोट का मलिकपुर स्थित मुख्य बिजली कार्यालय बन गया है। इससे पहले भी कर्मचारियों ने इसी जगह पर हफ्तों तक धरना दिया था, जिसके बाद आंदोलन को उग्र करते हुए उन्होंने बिजली मंत्री के आवास के बाहर भी विशाल राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया था।
उस समय प्रशासन और सरकार के उच्च प्रतिनिधियों ने कर्मचारी यूनियन के नेताओं के साथ एक विशेष बैठक की थी। इस बैठक में सरकार की ओर से कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को जल्द से जल्द मानने का पक्का भरोसा दिया गया था, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित किया था।
केवल आश्वासन मिला, नोटिफिकेशन नहीं
धरने पर बैठे कर्मचारी नेता अमन कुमार और राजेश का आरोप है कि सरकार ने बैठक में सहमति बनने के बावजूद पीठ दिखा दी है। कई दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से मांगों को लागू करने का कोई आधिकारिक आदेश या नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। लगातार हो रही अनदेखी: प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार केवल समय बिताने के लिए खोखले आश्वासन दे रही है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। आर-पार की लड़ाई का ऐलान: कर्मचारियों ने कहा कि बार-बार मिलने वाले धोखे से तंग आकर अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। जब तक उनके हाथों में सरकारी आदेश की कॉपी नहीं आ जाती, वे काम पर पूरी तरह नहीं लौटेंगे। चरमरा सकती है बिजली आपूर्ति, आम जनता पर मंडराया संकट कच्चे कर्मचारियों के इस दोबारा शुरू हुए आंदोलन का सीधा असर पठानकोट और आसपास के क्षेत्रों की बिजली सेवाओं पर पड़ सकता है। बिजली की लाइनों को ठीक करने और फील्ड का ज्यादातर काम इन्हीं कच्चे कर्मचारियों के भरोसे चलता है। यदि यह धरना लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में आम जनता को बिजली कटौती, फॉल्ट ठीक न होने और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
जनता से सहयोग की अपील
कर्मचारी नेताओं ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर पंजाब सरकार की टालमटोल नीति को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बिना समय गंवाए उनकी मांगों पर तुरंत अमल किया जाए ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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