लुधियाना की 5 साल की महरीन बनी कराटे चैंपियन: मलेशिया में जीता सिल्वर, 18 देशों के 2000 खिलाड़ियों को पछाड़ा; घर लौटने पर ग्रैंड वेलकम – Ludhiana News

लुधियाना की 5 साल की महरीन बनी कराटे चैंपियन:  मलेशिया में जीता सिल्वर, 18 देशों के 2000 खिलाड़ियों को पछाड़ा; घर लौटने पर ग्रैंड वेलकम – Ludhiana News




पंजाब की नन्ही कराटे खिलाड़ी महरीन कौर मलेशिया के कुआलालंपुर में 25वीं माइलो अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है। प्रतियोगिता में 18 देशों के 2000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। जीत के बाद अपने घर लुधियाना पहुंची महरीन का परिजनों ने ग्रैंड वेलकम किया। चार साल नौ महीने की उम्र में महरीन को यह सफलता ऐसे ही नहीं मिली बल्कि वो करीब ढाई साल से लगातार इसके लिए मेहनत कर रही थी। महरीन की मां संदीप कौर ने बताया कि जब वो दो साल की थी तब से कराटे की प्रैक्टिस कर रही है। डेढ़ साल से कोच के पास प्रॉपर ट्रेनिंग कर रही है और ट्रेनिंग के दौरान उसने स्थानीय स्तर की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर मेडल जीत हैं। शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उसका चयन माइलो इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप के लिए हुआ था। महरीन की कोच की मानें तो अब वह उसे एशियन व कॉमनवेल्थ लेवल की चैंपियनशिप के लिए तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि महरीन में बहुत टेलेंट है और उसने अपने टेलेंट का लोहा 18 देशों के 2000 खिलाड़ियों के बीच दिखाया है। लुधियाना से मलेशिया में सिल्वर मेडल जीतने की पूरी कहानी सिलसिलेवार जानिए… घर पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत मलेशिया में तिरंगा लहराने के बाद जब नन्ही कराटे स्टार महरीन कौर अपने गृह नगर वापस लौटी, तो वहां का नजारा देखने लायक था। घर पहुंचने पर उसका ढोल-नगाड़ों और फूलों के हार के साथ ग्रैंड वेलकमकिया गया। पूरे मोहल्ले और रिश्तेदारों ने महरीन का स्वागत किया। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान महरीन की बहन और उसकी दादी भी उसके साथ मलेशिया गए थे, जिन्होंने वहां उसका हौसला बढ़ाया। मेडल जीतने के बाद महरीन खुद भी बेहद खुश और उत्साहित नजर आई। महरीन का अगला मुख्य टास्क अब एशियन और कॉमनवेल्थ लेव की बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर देश के लिए गोल्ड जीतना है। माता-पिता बोले- बेटों से कम नहीं हैं हमारी बेटियां महरीन की मां संदीप कौर और पिता राजनजीत सिंह जिला अधिकारी दफ्तर में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी इतनी कम उम्र में देश के लिए इंटरनेशनल मेडल ले आएगी। महरीन के परिवार में वह दो बहनें हैं। माता-पिता का कहना है कि “हमारे घर में दो बेटियां हैं और हम दोनों को अपने बेटों की तरह ही पालते हैं। समाज चाहे जो सोचे, लेकिन हमारे लिए हमारी बेटियां हमारे बेटों से बढ़कर हैं। आज महरीन ने जो मुकाम हासिल किया है, उसने साबित कर दिया है कि अगर बेटियों को सही अवसर और सहयोग मिले तो वे दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।” डिजिटल स्क्रीन से दूर रखने के लिए शुरू किया था सफर संदीप कौर ने एक दिलचस्प बात साझा करते हुए बताया कि महरीन बचपन से ही बहुत ज्यादा एक्टिव और एनर्जेटिक रही है। परिवार का मुख्य उद्देश्य उसे मोबाइल फोन, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों की लत से दूर रखना था, ताकि वह शारीरिक रूप से स्वस्थ रहे और खेलों से जुड़ सके। उसकी इसी असीमित ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए उन्होंने उसे कराटे की ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया था। मोबाइल की स्क्रीन से दूर रखने की यह छोटी सी शुरुआत आज एक अंतरराष्ट्रीय मेडल में बदल चुकी है।



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