क्लेम खारिज करने पर लगाया जुर्माना – Jalandhar News

क्लेम खारिज करने पर लगाया जुर्माना – Jalandhar News



भास्कर न्यूज | जालंधर जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण कमिशन ने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी द्वारा प्री-एग्जिस्टिंग बीमारी का हवाला देकर क्लेम खारिज करने और पॉलिसी रद्द करने को सेवा में कमी व अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना है। कमिशन ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता रक्षा देवी की हेल्थ पॉलिसी दोबारा बहाल करने, 2,03,739 रुपये का मेडिकल क्लेम 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने तथा मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार और 10 हजार वकील खर्च देने का आदेश दिया हैं। दोआबा चौक निवासी बुजुर्ग महिला की तरफ से कमिशन में दायर शिकायत में बताया कि वह वर्ष 2014 से लगातार मेडिक्लेम पॉलिसी ले रही थीं। बाद में उन्होंने अपनी पॉलिसी ओरिएंटल इंश्योरेंस से पोर्ट कराकर स्टार हेल्थ की 7.50 लाख रुपये की ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली। उनका आरोप था कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने बेहतर सुविधाओं का भरोसा देकर पॉलिसी दिलाई, लेकिन कोई मेडिकल जांच नहीं कराई और न ही पॉलिसी की शर्तें सही तरीके से बताईं। उपभोक्ता ने बताया कि अप्रैल 2022 में वर्टिगो की शिकायत पर उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। कंपनी ने पहले केशलैस सुविधा देने से इनकार कर दिया और बाद में अस्पताल का खर्च लौटाने का दावा भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि भर्ती होना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक नहीं था। जनवरी 2023 में सांस लेने में तकलीफ के चलते दोबारा भर्ती होने पर भी कंपनी ने कैशलेस सुविधा और री-इम्बर्समेंट क्लेम यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उन्हें पहले से सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) थी, जिसकी जानकारी उन्होंने पॉलिसी लेते समय नहीं दी थी। बाद में कंपनी ने पॉलिसी भी रद्द कर दी। कमिशन ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि शिकायतकर्ता को पॉलिसी लेते समय सीओपीडी होने की जानकारी थी या उन्होंने जानबूझकर कोई तथ्य छिपाया था। आयोग ने कहा कि केवल अस्पताल के कुछ रिकॉर्ड में बीमारी का उल्लेख होना पर्याप्त नहीं है। यदि कंपनी को संदेह था तो पॉलिसी पोर्ट करते समय मेडिकल परीक्षण कराना उसकी जिम्मेदारी थी। आयोग ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता वर्ष 2014 से लगातार बीमा कवर में थीं, इसलिए बिना ठोस साक्ष्य के प्री-एग्जिस्टिंग बीमारी का आधार बनाकर क्लेम खारिज करना उचित नहीं था। कमिशन ने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता की हेल्थ पॉलिसी निरंतरता लाभ के साथ बहाल करने का आदेश दिया है।



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