पठानकोट-गुरदासपुर के लोगों पर फिर बाढ़ का खतरा: रावी में बढ़ा जलस्तर, मिट्टी की बोरियां गली, पंटून पुल बहा; ग्रामीणों की चेतावनी – Pathankot News

पठानकोट-गुरदासपुर के लोगों पर फिर बाढ़ का खतरा:  रावी में बढ़ा जलस्तर, मिट्टी की बोरियां गली, पंटून पुल बहा; ग्रामीणों की चेतावनी – Pathankot News




पिछले साल बाढ़ की तबाही झेल चुके पठानकोट के कोहलियां से लेकर गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक के सीमावर्ती इलाकों में एक बार फिर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। रावी दरिया का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन के पक्के बांध बनाने के दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात ऐसे हैं कि करीब 40 से 50 गांवों पर बाढ़ का सीधा खतरा मंडरा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार और कैबिनेट मंत्री केवल बयान देने और दौरे करने तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर राहत और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि सिर्फ सर्वे और औपचारिक निरीक्षण के लिए आते हैं, ताकि अखबारों की सुर्खियां बन सकें। उनका कहना है कि प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। 90 करोड़ की फाइलें पास, पर जमीन पर ‘एक ढेला’ नहीं लगा गांव पोला के निवासी बलवीर सिंह और परशोत्तम लाल ने प्रशासन व सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कैबिनेट मंत्री दो बार पूरे लाव-लश्कर के साथ इलाके का दौरा कर चुके हैं। उस दौरान अखबारों में खबरें प्रकाशित हुईं कि क्षेत्र के लिए 90 करोड़ और 8 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए गए हैं तथा जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। हालांकि कई महीने बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई काम दिखाई नहीं दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जलभराव रोकने के लिए लगाई गई मिट्टी की बोरियां पानी आने से पहले ही सड़कर फट चुकी हैं। उनका कहना है कि नदी में पानी का मामूली बहाव भी इस अस्थायी व्यवस्था को नहीं झेल पाएगा। गुहार लगाने गए ग्रामीणों को मिला राजनीतिक जवाब बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि जब वे अपनी डूबती जमीनों और गांवों को बचाने की मांग लेकर एक मंत्री के पास पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि, “तुम तो कांग्रेसी बंदे हो, तुम्हारी बात क्यों सुनें?” सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला परशोत्तम लाल का आरोप है कि पिछले साल बाढ़ में उनकी 40 से 50 किल्ले जमीन और फसल नदी में बह गई थी, लेकिन उन्हें सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला। उनका कहना है कि उस समय सामाजिक संस्थाओं ने राशन वितरित कर प्रभावित परिवारों की मदद की, जबकि सरकारी सहायता नहीं पहुंची। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अब वन विभाग के स्टे का हवाला देकर सुरक्षा संबंधी कार्य नहीं किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो दर्जनों गांवों को एक बार फिर बाढ़ की मार झेलनी पड़ सकती है। नेताओं को चेतावनी: 2027 के चुनाव में गांवों में घुसने नहीं देंगे गांव चाढ़क के नंबरदार जोगराज ने प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों के गड्ढे तक नहीं भरे गए, तो स्थायी और मजबूत बांध बनने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान वोट मांगने आने वाले नेताओं का गांवों में विरोध किया जाएगा। वोट किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं ग्रामीण: सरकार दौड़ा रही कागजी घोड़े स्थानीय निवासी राजकुमार ने कहा कि यह केवल पानी का संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का भी मामला है। उनका आरोप है कि पिछले साल आई बाढ़ से कोई सबक नहीं लिया गया और अब भी जमीनी स्तर पर पर्याप्त तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। राजकुमार का कहना है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर बाढ़ से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो क्षेत्र को एक बार फिर गंभीर नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यह उनकी आशंका और दावा है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जानिए किन गांवों की जिंदगी ठप हो गई:-



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