संगरूर में गुरदयाल सिंह मेमोरियल गेट पर विवाद: गांव मीमसा में निर्माण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने, सरकार ने भेजा फंड – Sangrur News
संगरूर जिले के नजदीकी गांव मीमसा में ‘गुरदयाल सिंह मेमोरियल गेट’ के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में गांव के दो पक्ष पूरी तरह आमने-सामने आ गए हैं, जिससे गांव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ जहां पंचायत और ग्रामीण इस गेट को बनाने पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ स्थानीय निवासी इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। यह गेट देश की आजादी के लिए लड़ने वाले गुरदयाल सिंह की याद में बनाया जा रहा है। परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि गुरदयाल सिंह ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘आज़ाद हिंद फौज’ (INA) में शामिल होकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं दीं और सेवानिवृत्ति के बाद वापस अपने पैतृक गांव मीमसा लौट आए थे। पंजाब सरकार ने गुरदयाल सिंह को ‘आज़ादी का सिपाही’ (स्वतंत्रता सेनानी) मानते हुए उनकी याद को जीवंत रखने के लिए इस मेमोरियल गेट के निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की ग्रांट मंजूर की है। गांव के सरपंच और अधिकांश ग्रामीण इस फैसले का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं। विरोध कर रहे पक्ष का तर्क: प्रभावित होंगी दुकानें दूसरी ओर, जिस जगह पर इस गेट का निर्माण प्रस्तावित है, वहां सड़क किनारे बने घरों के लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। विरोध कर रहे परिवार का आरोप है कि गेट बनने से उनकी दुकानों के आगे का हिस्सा प्रभावित होगा, जिससे उनके रोजगार पर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि सरपंच राजनीतिक दबाव या गलत मंशा के तहत इसी जगह पर गेट बनाने की जिद कर रहे हैं। गांव में तनाव, सरपंच के बचाव में उतरे ग्रामीण इस विवाद के चलते गांव में माहौल गर्मा गया है। जहां पीड़ित दुकानदार पक्ष सरपंच पर मनमानी का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में ग्रामीण सरपंच के फैसले के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि देश के शहीद और स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान में बनने वाला यह गेट पूरे गांव का गौरव है और इसमें किसी भी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। फिलहाल दोनों पक्षों के अपने-अपने दावों पर अड़े होने के कारण गेट का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में दखल देकर कोई बीच का रास्ता निकाल पाता है या नहीं।
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