बैरिकेडिंग तोड़कर 20 से अधिक निहंग देहरादून में घुसे: कुल्हाल बॉर्डर पर झड़प के बाद पथराव और डंडे फेंके, पुलिस तलाश में जुटी – Dehradun News
कुल्हाल चेक पोस्ट पर बैरिकेडिंग तोड़कर उत्तराखंड में घुसे निहंग, इस दौरान पथराव और डंडे भी फेंके।
चंडीगढ़ और पंजाब के मोहाली से निहंग सिखों का जत्था उत्तराखंड में घुस चुका है। पांवटा साहिब गुरुद्वारा (हिमाचल) से आगे बढ़कर वे उत्तराखंड-हिमाचल सीमा स्थित कुल्हाल बॉर्डर पहुंचे, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की।
.
इस दौरान निहंग सिखों ने बैरिकेडिंग तोड़ने के लिए चौपहिया वाहन तक आगे बढ़ा दिया। पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ झड़प के बीच उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की। मौके पर हंगामा हुआ। प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव और डंडे फेंके जाने की बात भी सामने आई। निहंगों के साथ कुछ अन्य सिख युवक भी दिखाई दिए।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पुलिस की रोकने के लिए लगाई गई सुरक्षा व्यवस्था को पार करते हुए 20 से अधिक निहंग देहरादून के प्रेमनगर पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि वे किसी दूसरे रास्ते से निकल गए हैं। पुलिस अब उनकी तलाश में जुटी है। पूरे शहर में जगह-जगह चेकिंग की जा रही है। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल और डीएम आशीष चौहान मौके पर हैं।
तस्वीरें देखिए-
देहरादून के प्रेमनगर में तैनात पुलिस फोर्स।

बैरिकेडिंग तोड़कर देहरादून के प्रेमनगर पहुंचे निहंग।

चौपहिया वाहन से पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े निहंग।

कुल्हाल चेक पोस्ट पर बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास करते निहंग।

कुल्हाल चेक पोस्ट पर हंगामा करते निहंग।
निहंगों को समझाने की कोशिश नाकाम
सूत्रों के अनुसार पांवटा साहिब में बैठक के दौरान निहंगों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वे उत्तराखंड की ओर कूच कर गए। निहंगों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे उत्तराखंड जाकर संबंधित लोगों से बातचीत कर मामले को सुलझाना चाहते हैं और किसी तरह का विवाद या कानून व्यवस्था खराब नहीं करना चाहते।

कुल्हाल चेक पोस्ट पर निहंगों को रोकती पुलिस।
चार निहंगों को वापस भेजने की मांग
निहंगों ने चार निहंगों को सम्मान के साथ पंजाब वापस भेजने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों से बातचीत हुई है और उन्हें आश्वासन मिला है कि जल्द ही चारों निहंगों की जमानत कराने की कोशिश की जाएगी। इसके बाद वे यात्रा पूरी कर वापसी में उन्हें साथ लेकर पंजाब लौटना चाहते हैं।

पांवटा साहिब में पुलिस अधिकारियों से उलझता निहंग।

हिमाचल प्रदेश सीमा पर ITBP, PAC और पुलिस बल की तैनाती की गई है।
किसी भी दमन के आगे नहीं झुकेंगे
कूच करने से पहले मोहाली के सोहना गुरुद्वारे में निहंग सिखों ने एक मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने कहा-
सिखों के अधिकारों के खिलाफ कुछ साजिशें रची जा रही हैं। हम आज अरदास करके यह संकल्प ले रहे हैं कि हम किसी भी दमन के आगे झुकेंगे नहीं। हमारी इस अरदास को जो लोग सिर्फ एक सामान्य प्रार्थना समझ रहे हैं, वे भूल रहे हैं कि यह हमारा संकल्प है। अब हम उत्तराखंड की ओर कूच करेंगे।

हालात को देखते हुए हिमाचल और यूपी बॉर्डर पर ITBP, PAC और पुलिस बल तैनात किया गया। कुल्हाल बॉर्डर पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की, जहां निहंगों को रोकने का प्रयास किया गया, पर नाकाम रहा। तैनाती में सिख पुलिसकर्मियों को भी आगे रखा गया था।

बॉर्डर पर गाड़ियों की चेकिंग करती हुई पुलिस।
सोमवार को किया था कूच का ऐलान
रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में पंजाब से आए निहंगों ने सोमवार को बताया था कि उनके कुछ साथी 25 जून को उत्तराखंड पहुंचेंगे। वे पहले चमोली और रुद्रप्रयाग के गुरुद्वारों का दौरा करेंगे और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद हेमकुंड साहिब रवाना होंगे।
निहंगों का कहना है कि जत्था उत्तराखंड के गुरुद्वारों में सिख श्रद्धालुओं के साथ होने वाले व्यवहार और व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेगा। सरकार ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन, सिख प्रतिनिधिमंडल और निहंगों के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और हेमकुंड साहिब आने वाले हर श्रद्धालु का सम्मान किया जाएगा।

दो दिन पहले रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में पंजाब से आए 4 निहंग चौथे दिन वापस लौट गए थे।
UKD और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा का प्रदर्शन
इधर, नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने संयुक्त प्रदर्शन किया। हालांकि मौके पर करीब 50 लोग ही मौजूद रहे।
स्वाभिमान मोर्चा के नेता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि नगरासू का मामला निहंग सिख बनाम उत्तराखंड का नहीं, बल्कि दो पक्षों के बीच हुए विवाद का है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में प्रदर्शन करते हुए UKD और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ।
सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए क्यों हुआ विवाद…
1. 16 जून 2026 कर्णप्रयाग बाजार में हिंसक झड़प और चक्काजाम- हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे निहंग सिखों के एक जत्थे की बाइक कर्णप्रयाग बाजार में खड़ी एक कार से टकरा गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।
आरोप है कि कुछ निहंगों ने तलवारों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया, जिसमें कई स्थानीय लोग घायल हो गए। एक स्थानीय होटल व्यवसायी की हालत गंभीर होने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर AIIMS ऋषिकेश भेजा गया।
इस घटना के विरोध में स्थानीय व्यापारियों और लोगों ने बद्रीनाथ हाईवे पर करीब 5 घंटे तक चक्काजाम किया, जिससे गौचर से नंदप्रयाग तक लंबा जाम लग गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 4 आरोपी निहंगों को गिरफ्तार कर लिया।

निहंगों ने 16 जून को चमोली के कर्णप्रयाग बाजार में स्थानीय लोगों को तलवार से मारा था।
2. 20 जून दूसरे पक्ष पर भी मुकदमा दर्ज- सिख समुदाय ने आरोप लगाया कि निहंगों ने आत्मरक्षा में कदम उठाया था, लेकिन पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की। इसके बाद, एक घायल सिख श्रद्धालु के पिता की शिकायत पर 20 जून को कर्णप्रयाग कोतवाली में स्थानीय अज्ञात लोगों के खिलाफ भी काउंटर FIR दर्ज की गई।
3. 20 जून 2026 नगरासू गुरुद्वारे में नया विवाद- कर्णप्रयाग की घटना के बाद निहंगों का जत्था रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में ठहरा हुआ था। वे स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन और प्रशासन के रवैये से नाराज थे।
शनिवार (20 जून) की शाम विवाद इतना बढ़ गया कि आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार और एक बाबा के साथ मारपीट की और वहां मौजूद एक व्यक्ति को बंधक बना लिया। इसके बाद वे अपने पारंपरिक हथियारों के साथ गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर चले गए और खुद को अंदर बंद कर लिया।
4. 21 जून पुलिस घेराबंदी, पीएसी और आईटीबीपी तैनात- नगरासू गुरुद्वारे में बंधक संकट की खबर मिलते ही पुलिस, PAC और ITBP के जवानों को मौके पर तैनात कर दिया गया। सुरक्षा बलों ने पूरे गुरुद्वारे को चारों तरफ से घेर लिया।
रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा और एसपी निहारिका तोमर ने निहंगों से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन शुरुआती दौर में निहंगों ने बातचीत से इनकार कर दिया। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दीं।
5. 22 जून बंधक मुक्त हुए, आपसी सहमति से सुलझा विवाद- प्रशासन, सिख प्रतिनिधियों और निहंगों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। इसके बाद निहंगों ने बंधक बनाए गए लोगों को सुरक्षित मुक्त कर दिया। निहंगों ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि पुलिस-प्रशासन ने उनका सहयोग किया है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
6. 23 जून निष्पक्ष जांच के लिए केस हरिद्वार ट्रांसफर, बड़े स्तर पर जांच शुरू- आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कर्णप्रयाग में दर्ज दोनों FIR की जांच चमोली से हरिद्वार ट्रांसफर कर दी। अब इन मामलों की निगरानी एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर कर रहे हैं।
सिख संगठनों ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए श्रद्धालुओं को बिना दस्तार (पगड़ी) के कोर्ट में पेश किया गया और उनके साथ बदसलूकी हुई। इन गंभीर आरोपों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह चौहान को सौंपी गई है, जिन्हें 2 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपनी है।
7. पंजाब लौटे निहंग, बॉर्डर पर अलर्ट और धारा 163 लागू- रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारा साहिब में डटे निहंग, पंजाब से आए एक अन्य जत्थे से मुलाकात करने के बाद मंगलवार को वापस पंजाब लौट गए। गुरुद्वारे की व्यवस्था फिर से इसके पुराने संचालक बाबा बेअंत सिंह को सौंप दी गई है।
निहंगों ने कहा कि विवाद आपसी बातचीत और प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति और अफवाहों को रोकने के लिए कर्णप्रयाग, चमोली और रुद्रप्रयाग के संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (निषेधाज्ञा/कर्फ्यू जैसी पाबंदियां) लागू है, जो 27 जून तक प्रभावी रहेगी।
अब फिर से निहंग कर्णप्रयाग मामले में की गई कार्रवाई को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारा साहिब में डटे थे निहंग।

————————-
ये खबर भी पढ़ें…
उत्तराखंड के गुरुद्वारे से 4 दिन बाद पंजाब लौटे निहंग:कार्रवाई नहीं करने की शर्त पर नीचे उतरे, CM धामी से मिला था प्रतिनिधिमंडल

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में 4 निहंग, पंजाब से आए जत्थे से मुलाकात करने के बाद चौथे दिन यानी मंगलवार को वापस लौट गए हैं। गुरुद्वारे की व्यवस्था फिर से संचालक बाबा बेअंत सिंह को सौंप दी गई है। निहंगों ने कहा कि गुरुद्वारे से जुड़ा विवाद आपसी बातचीत और प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया है। (पढ़ें पूरी खबर)

