FSL रिपोर्ट से कॉपरेटिव सोसाइटी के घोटाले में नया खुलासा: लुधियाना की सोसाइटी के मैनेजर साधु सिंह ने इंसपेक्टर के फर्जी साइन व मुहर लगाकर बनाई बैलेंस शीट – Ludhiana News
लुधियाना की ‘दी दोराहा कॉपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी लिमिटेड’ में हुए करोड़ों रुपये के चर्चित घोटाले में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) पंजाब, मोहाली की जांच रिपोर्ट आने के बाद एक अहम खुलासा हुआ है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि सोसाइटी के तात्कालिक मैनेजर साधु सिंह ने बैलेंस को टैंपर किया और अपने करीब एक करोड़ रुपए के घपले को छुपाने की कोशिश की। साधु सिंह ने ऑडिट डिपार्टमेंट की महिला इंस्पेक्टर व अपने सेल्समैन की फर्जी मुहर तैयार की और उसके बाद फर्जी बैलेंस रिपोर्ट तैयार की। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने साधु सिंह के खिलाफ 2023 में दर्ज हुए मुकदमे में नई धाराएं जोड़ दी हैं और अब उसे गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। दोराहा पुलिस का कहना है कि एफएलएल रिपोर्ट आने से स्पष्ट हो गया कि करीब एक करोड़ का घपला सुनियोजित तरीके से किया गया। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद सेलमैन जसदेव सिंह भी सामने आया है और उसने बताया कि साधु सिंह ने उसके और ऑडिट इंस्पेक्टर अदिति के फर्जी साइन व मुहर बनाकर बैलेंस सीट तैयार दी थी। जिसे ऑडिट में पकड़ लिया गया। घोटाला क्या था और कितने का था यह पूरा घोटाला मुख्य रूप से करोड़ों रुपये की सरकारी व सोसाइटी पैसों के गबन और दफ्तर के सामान की चोरी से जुड़ा है। ऑडिट विभाग की विशेष रिपोर्ट (वर्ष 2021-22) के अनुसार सासाइटी में कुल 1,00,68,081.23 रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोपी मैनेजर साधु सिंह ने 9,13,100.00 रुपये का सीधा वित्तीय गबन किया जबकि सोसाइटी के फंड से 49,27,514.73 रुपये की भारी-भरकम राशि का गलत इस्तेमाल किया गया। रिकॉर्ड और बैलेंस शीट में 42,27,466.50 रुपये का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं था। सोसाइटी के सामान और कबाड़ की चोरी इसके अलावा, आरोपी पर यह भी आरोप है कि उसने दफ्तर से 2 एयर कंडीशनर (AC) और 1 अलमारी चुराकर सोसाइटी के टेम्पो में लोड करवा के ले गया। यही नहीं, सोसाइटी की जमीन पर बने मेहता अस्पताल की छत पर पड़ा लोहे का कीमती स्क्रैप (कबाड़) भी आरोपी चोरी करके ले गया। बैलेंस शीट की जांच से पकड़ में आया पूरा मामला साधु सिंह साल 2005 से सोसाइटी का मैनेजर था। सोसाइटी की हाईवे पर स्थित महंगी प्रॉपर्टीज से करोड़ों का किराया आता है। इतने लंबे समय से जमे होने के कारण उसका हौसला बढ़ चुका था, लेकिन वह एक क्लेरिकल हेराफेरी के चक्कर में पकड़ा गया। यह मामला तब खुला जब ऑडिट विभाग ने बैलेंस शीट की बारीकी से जांच की। जांच में सामने आया कि ग्राहकों से प्राप्त होने वाली राशि असल में 39,93,933.03 रुपये (लगभग 40 लाख) थी। साधु सिंह ने इस बड़ी रकम को कागजों में कम दिखाने के लिए चालाकी से डेसिमल का स्थान बदल दिया और एंट्री को 3,99,393.30 रुपये (लगभग 4 लाख) दर्ज कर दिया। इस एक हेराफेरी से सीधे तौर पर 35,94,539 रुपये करीब 36 लाख का घपला दिखा। उसके बाद ऑडिट टीम ने पूरे रिकार्ड को खंगाला तो एक करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई। हालांकि अभी डेढ़ साल का ऑडिट होना बाकी है। फॉरेंसिक (FSL) रिपोर्ट में क्या बात सामने आई जब दिसंबर 2023 में मामला दर्ज हुआ, तो संदेहास्पद दस्तावेजों और हस्ताक्षरों को जांच के लिए ‘फॉरेंसिक साइंस लैबोट्री (FSL) पंजाब, मोहाली’ भेजा गया था। FSL की इस रिपोर्ट ने आरोपी साधु सिंह के सारे झूठ बेनकाब कर दिए। रिपोर्ट में साबित हुआ कि साधु सिंह ने ऑडिट विभाग की इंस्पेक्टर अदिति की जाली आधिकारिक मुहर तैयार की थी और उसका इस्तेमाल किया था। ऑडिट रिपोर्ट को सही साबित करने के लिए आरोपी ने ऑडिट इंस्पेक्टर अदिति और सोसाइटी के ही एक सेल्समैन जसदेव सिंह के फर्जी हस्ताक्षर किए थे, ताकि किसी को बैलेंस शीट में हुए इस बड़े बदलाव पर शक न हो। घोटाले में अब तक यह हुई कार्रवाई जानिए… साधु सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज: 2023 में जब सोसाइटी का सामान चोरी व घपले की बात सामने आई तो दोराहा थाने में साधु सिंह के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई। साधु सिंह को इस मामले में गिरफ्तार किया गया लेकिन हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गई। साधु सिंह को डिपार्टमेंट ने टर्मिनेट किया: गबन और धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों को देखते हुए कॉपरेटिव डिपार्टमेंट ने कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी साधु सिंह को 20 फरवरी 2026 को नौकरी से टर्मिनेट कर दिया गया है। ऑडिट रिपोर्ट की फॉरेंसिक जांच: जांच के दौरान फॉरेंसिक रिपोर्ट में टैंपरिंग का शक हुआ तो पुलिस ने रिपोर्ट जांच के लिए भेजी। फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट अब पुलिस को मिली है। रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने अब साधु सिंह के खिलाफ पुरानी एफआईआर में ही नई धाराएं जोड़ दी। साधु सिंह की गिरफ्तारी के लिए कर रहे छापेमारी जांच अधिकारी एएसआई लखविंदर सिंह ने बताया कि दिसंबर 2023 के पुराने मामले में आरोपी साधु सिंह को माननीय हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन अब FSL रिपोर्ट के आधार पर मुकदमे में जालसाजी की नई और गैर-जमानती धाराएं (465, 467, 468, 471) जोड़ दी गई हैं। नई धाराएं जुड़ने के बाद से आरोपी साधु सिंह गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार है। पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार उसके छिपने के ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
दोराहा सोसाइटी गबन मामला
करोड़ों के घपले में शामिल साधु सिंह की धाराएं बढ़ाई गई
गिरफ्तारी के लिए पुलिस कर रही छापेमारी लुधियाना के दोराहा कॉपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी सोसाइटी के ऑडिट विभाग की जांच व एफ एस एल पंजाब मोहाली की जांच रिपोर्ट ने हैरानीजनक खुलासे किए हैं कि उस समय तैनात साधु सिंह ने सोसाइटी की बैलेंस शीट में छेड़ छाड़ कर व ऑडिट विभाग पंजाब इंस्पेक्टर ऑडिट अदिती के जाली दस्खत व सोसाइटी के ही एक कर्मचारी जसदेव सिंह के जाली दस्खत किए हैं और इस गबन को किया। जिस दोराहा पुलिस ने पुराने दर्ज हुए मामले में जुर्म बढ़ाते हुए साधु सिंह पर 465,467,468,471 आईपीएस तहत 17 मई 2026 को बढ़ोतरी कर दी गई है। विभाग की तरफ से साधु सिंह को पहले ही 20 फरवरी को टर्मिनेट कर दिया गया है। अब पुलिस इस आरोपी साधु सिंह की तलाश में छापेमारी कर रही है। सहायक थानेदार लखविंदर सिंह ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है और वो जल्द ही सलाखों के पीछे होगा। सोसाइटी की वार्षिक आमदन करोड़ों में होती है क्योंकि इस सोसाइटी के अधीन दोराहा के हाईवे पर महंगी प्रॉपटी है जिस का किराया करोड़ों में आता है। यह सोसाइटी तब सुर्खियों में आई जब दिसंबर 2023 में इस सोसाइटी के उस समय तैनात प्रबंधक साधु सिंह पर करोड़ों रुपए के गबन का मामला दर्ज किया गया। उस मामले में भले ही माननीय हाई कोर्ट से आरोपी को जमानत मिल गई थी
डेढ़ वर्ष का ऑडिट अभी भी बाकी
सहायक थानेदार लखविंदर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी साधु सिंह के कार्यकाल दौरान डेढ़ वर्ष का ऑडिट 1 अप्रैल 2022 से 15 सितंबर 2023 का ऑडिट अभी भी बाकी है जिस की बहुत जल्द जांच होगी अगर इस दौरान कोई ओर गबन सामने आता है तो उसका का अलग से मामला दर्ज किया जाएगा। 2005 से आरोपी साधु है इस सोसाइटी का प्रबंधक
जानकारी अनुसार आरोपी साधु सिंह 2005 से ही दोराहा सोसाइटी का प्रबंधक चला आ रहा है। कैसे आया मामला सामने?
दोराहा सोसाइटी में करोड़ों के गबन का मामला उस समय सामने आया जब आरोपी साधु सिंह ने बैलेंस शीट में एक 3993933.03की एंट्री को 399393.30 कर दिया। जब ऑडिट विभाग ने बारीकी से इस की जांच की तो यह एंट्री गलत पाई गई और गबन की शंका सामने आने लगी। जिस से करोड़ों का गबन मामला सामने आया। पूर्व प्रबंधक साधु सिंह पर एफआईआर संख्या 186 में गंभीर आरोप लगाए गए हैं; गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं। पंजाब सरकार के सहकारिता विभाग के लेखापरीक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट और पंजाब के मोहाली स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व प्रबंधक साधु सिंह को दोषी पाया गया है। इन रिपोर्टों के आधार पर, दोराहा पुलिस स्टेशन ने दोराहा मार्केटिंग सोसाइटी लिमिटेड, दोराहा के पूर्व प्रबंधक साधु सिंह के खिलाफ लगभग 1 करोड़ रुपये के चर्चित गबन मामले में गंभीर आपराधिक आरोप जोड़े हैं, जिसका एफआईआर नंबर 186 है। भारतीय दंड संहिता की धारा 465, 467, 468 और 471 के तहत अतिरिक्त अपराध भी इस मामले में शामिल किए गए हैं। यह पाया गया कि साधु सिंह ने सोसायटी की लेखापरीक्षित बैलेंस शीट में हेराफेरी की थी। ग्राहकों से प्राप्त होने वाली राशि, जो मूल रूप से 39,99,933.03 रुपये दर्ज की गई थी, उसे धोखाधड़ी से बदलकर 3,99,393.30 रुपये कर दिया गया था। इस हेराफेरी के दौरान, ऑडिट इंस्पेक्टर सुश्री अदिति की जाली आधिकारिक मुहर कथित तौर पर तैयार की गई और उसका इस्तेमाल किया गया। सुश्री अदिति और सेल्समैन jasdev सिंह दोनों के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए, जिससे 35,94,539 (लगभग 35 लाख) रुपये का गबन संभव हो सका। पुलिस साधु सिंह की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए उसके आवास और अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। हालांकि, वह फिलहाल फरार है। पुलिस के मुताबिक, उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस एफआईआर (FIR) के अनुसार आरोपी साधू सिंह (प्रबंधक, दी दोराहा विपणन सहकारी समिति लिमिटेड, दोराहा) पर लगे आरोपों को सिलसिलेवार 1. वित्तीय गबन और सरकारी राशि का दुरुपयोग (पहला मुख्य आरोप) विशेष ऑडिट रिपोर्ट (वर्ष 2021-22) के अनुसार आरोपी पर समिति के पैसों में बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी करने का आरोप है। इस कुल $1,00,68,081.23$ रुपये (एक करोड़ अड़सठ हजार इक्यासी रुपये तेईस पैसे) की राशि को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है: कुल गबन की राशि (Stolen/Embezzled Amount): $9,13,100.00$ रुपये का सीधा गबन किया। दुरुपयोग की राशि (Misappropriation Amount): $49,27,514.73$ रुपये की समिति की राशि का गलत इस्तेमाल या कुप्रबंधन किया। गंभीर कमी/लापरवाही की राशि (Grave Deficiencies Amount): $42,27,466.50$ रुपये की राशि के रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं और कमियां पाई गईं। 2. समिति के कार्यालय से सामान की चोरी (दूसरा मुख्य आरोप) समिति के कच्चे कर्मचारियों (ड्राइवर, सेवादार आदि) के लिखित बयानों के आधार पर आरोपी पर कार्यालय की संपत्तियों को चुराने का आरोप है: एयर कंडीशनर और अलमारी की चोरी: आरोपी ने समिति के दफ्तर से 2 एयर कंडीशनर (AC) और 1 अलमारी उठाई और उसे समिति के ही टेम्पो में लादकर चोरी कर लिया। 3. अस्पताल की छत से लोहे के स्क्रैप की चोरी (तीसरा मुख्य आरोप) लोहे के कबाड़ (Scrap) की चोरी: समिति की जमीन पर बने मेहता अस्पताल की छत पर जो लोहे का स्क्रैप (कबाड़) पड़ा हुआ था, आरोपी उसे भी टेम्पो में लादकर अवैध रूप से चोरी करके ले गया। विधिक निष्कर्ष (Legal Actions): इन सभी आरोपों (वित्तीय गबन, अमानत में खयानत और चोरी) के आधार पर पहली नजर में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 408 (लिपिक या सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात/अमानत में खयानत) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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