अमरनाथ यात्रा से पहले शुरू होगा NH-44 माधोपुर ब्रिज: बाढ़ में क्षतिग्रस्त रावी पुल का 15 करोड़ से जीर्णोद्धार; 95 फीसदी काम हो चुका पूरा – Pathankot News

अमरनाथ यात्रा से पहले शुरू होगा NH-44 माधोपुर ब्रिज:  बाढ़ में क्षतिग्रस्त रावी पुल का 15 करोड़ से जीर्णोद्धार; 95 फीसदी काम हो चुका पूरा – Pathankot News




26-27 अगस्त 2025 को रणजीत सागर बांध से रावी में छोड़े गए पानी से आई बाढ़ से माधोपुर हेडवर्क्स पर भारी तबाही हुई थी। इसमें पंजाब से जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 44 पर बने ब्रिज का काफी हिस्सा बह गया था। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने छह महीने में 15 करोड़ रुपए खर्च कर हाईवे ब्रिज के जीर्णोद्धार का काम लगभग पूरा कर लिया है। दावा किया जा रहा है कि ब्रिज को 1 जुलाई से शुरू हो रही श्री अमरनाथ यात्रा से पूर्व ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। अब इसका केवल कंप्लीशन इंस्पेक्शन बाकी है। बता दें, कि रावी में आई बाढ़ में नेशनल हाईवे के पुराने ब्रिज का कुछ हिस्सा बह गया था और साथ में हाईवे का एप्रोच रोड भी बह गया था। पुल के कई हिस्से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। रावी में पानी का बहाव कम होने के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने बहे स्पैन और पिलरों की जगह नए स्पैन बनाने,फ्लोर रिपेयर समेत ब्रिज के जीर्णोद्धार का करीब 15 करोड़ का टेंडर मूह (मध्य प्रदेश) की कंपनी पाथ इंडिया लिमिटेड को अलॉट किया था। रिकॉर्ड 6 महीने में पूरा किया काम
बता दें, दिसंबर के आखिर में काम शुरू कर 6 महीने दिन-रात कर ब्रिज के जीर्णोद्धार का काम 95 फीसदी पूरा कर लिया गया है। पानी के बहाव में बह गए ब्रिज के निचले हिस्से में 850 मीटर लंबा फ्लोर प्रोटेक्शन वर्क पूरा किया गया है और पूरे ब्रिज के डाउन स्ट्रीम में पत्थर लगाए गए हैं। सबसे बड़ा काम ब्रिज में 2 पियर (फाउंडेशन) तथा 3 स्पैन नए बनाए गए हैं। ब्रिज और हाईवे के बीच का बहा 140 मीटर एप्रोच रोड स्टोन पिचिंग और मिट्टी फीलिंग कर पूरा कर लिया गया है। 35 करोड़ से पूरी हुई हेडवर्क्स की रिपेयर
बारिश शुरू होने के पूर्व ही माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेटों के रिपेयर और नए गेट लगाने का काम भी 35 करोड़ खर्च कर पूरा कर लिया गया है। फ्लड गेट टूट जाने के कारण एक कर्मचारी की मौत भी हो गई थी तथा नरोट जैमल सिंह एरिया में भारी तबाही हुई थी। बह गए 4 गेटों की जगह नए गेटों का निर्माण कर लिया गया। उसी जगह 100 मीटर लंबा तथा 50 मीटर चौड़ा बेड बनाया गया। पानी के तेज दबाव से बेड को बचाने के लिए कंक्रीट की मोटी दीवार का भी खड़ी की गई है। 4 नए स्पैन बनाए गए हैं जिसके 3 फाउंडेशन (पियर) का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
हरियाणा की कंपनी दयानंद कंस्ट्रक्शन ने यह काम पूरा किया है। बता दें कि जीर्णोद्धार किए गए ब्रिज में अब 20 पियर (फाउंडेशन) और 21 स्पैन हो गए हैं जबकि पहले 18 पियर और 19 स्पैन थे। ब्रिज में पियर बढ़ाकर स्पैन का एरिया कम किया गया है ताकि मजबूती मिल सके। एक ही पुल पर दोनों ओर से निकल रहे ट्रैफिक से लग रहा जाम
रावी पर पंजाब से जम्मू-कश्मीर जाने तथा जेएंडके से पंजाब की ओर आने के अलग-अलग पुल हैं। जेएंडके से पंजाब की ओर आने वाला ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ था तभी से अप एंड डाउन दोनों ट्रैफिक एक ही ब्रिज से गुजारा जा रहा है जिस कारण आए दिन ब्रिज पर जाम लग रहा है और वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। एनएच 44 पर रावी पर बना यह ब्रिज रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य हिस्से से यही कनेक्ट करता है खासकर सेना और सुरक्षा बलों को जम्मू-कश्मीर पहुंचने का मुख्य मार्ग है। ब्रिज से रोजाना 10 हजार के करीब वाहन पार करते हैं। उधर फिर से बांध से रावी में पानी छोड़ा जा रहा है। फाइनल इंस्पेक्शन जल्द होगी
इस संबंधी हाईवे अथॉरिटी के साइट इंजीनियर यशवंत का कहना है कि उच्चाधिकारियों द्वारा ब्रिज की फाइनल इंस्पेक्शन जल्द ही की जाएगी जिसके बाद उसे ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाईवे अथॉरिटी का टारगेट है कि इसे श्री अमरनाथ यात्रा शुरू होने के पूर्व 25 से 28 जून के बीच खोल दिया जाएगा ताकि लोगों को आने-जाने में सुविधा हो सके। इसलिए अहम है माधोपुर पुल
पठानकोट जिले का माधोपुर पुल केवल एक सामान्य पुल नहीं है, बल्कि यह पंजाब को जम्मू-कश्मीर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण सड़क मार्ग है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर स्थित है, जो देश के प्रमुख उत्तर-दक्षिण संपर्क मार्गों में शामिल है। माधोपुर क्षेत्र पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा के पास स्थित है और इसे जम्मू-कश्मीर जाने का एक प्रमुख प्रवेश मार्ग माना जाता है। 1. जम्मू-कश्मीर का मुख्य रास्ता : माधोपुर पुल से होकर रोजाना हजारों वाहन जम्मू-कश्मीर की ओर आते-जाते हैं। सेना, पर्यटक, मालवाहक ट्रक और आम यात्री इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। किसी भी कारण से यहां यातायात प्रभावित होने पर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बीच आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है।
2. रणनीतिक महत्व : पठानकोट देश के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों के नजदीक है। माधोपुर मार्ग सेना और सुरक्षा बलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह जम्मू क्षेत्र की ओर जाने वाले प्रमुख संपर्क रास्तों में से एक है। 3. रावी नदी और सिंचाई से जुड़ा महत्व : माधोपुर क्षेत्र में रावी नदी पर माधोपुर हेडवर्क्स स्थित है, जहां से ऊपरी बारी दोआब नहर (UBDC) निकलती है। यह नहर पंजाब के कई इलाकों की सिंचाई और पानी की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। 4. तीन राज्यों का संपर्क केंद्र : माधोपुर को पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां से डलहौजी, चंबा, जम्मू और पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाने वाले मार्ग जुड़ते हैं। 5. व्यापार और परिवहन के लिए जरूरी : NH-44 होने के कारण यहां से बड़ी संख्या में ट्रक और व्यावसायिक वाहन गुजरते हैं। यह मार्ग उत्तर भारत के व्यापारिक नेटवर्क के लिए भी अहम भूमिका निभाता है। संक्षेप में: माधोपुर पुल की अहमियत इसलिए है क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर का प्रवेश द्वार, सेना की आवाजाही का महत्वपूर्ण मार्ग, व्यापारिक रास्ता और रावी नदी के जल प्रबंधन से जुड़ा केंद्र है।



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