संगरूर में 600 एकड़ खेती को पानी नहींं: खराब बोरहोल पानी से फसलें बरबाद, 22 साल से मिल रहा था पानी, 9 माह से संकट – Sangrur News
संगरूर जिले की लेहरा सब-डिवीजन के अंतर्गत आते गांव जवाहरवाला और कोटरा लेहल के किसान इन दिनों भारी परेशानी से जूझ रहे हैं। सिंचाई के लिए पिछले नौ महीनों से नहर का पानी न मिलने और जमीन के नीचे का पानी (बोरहोल वॉटर) खराब होने के कारण इन गांवों की लगभग 600 एकड़ कृषि भूमि पर फसलों को बचाना मुश्किल हो गया है। किसानों ने बताया कि साल 2003 में सरकार ने इन गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन की सिंचाई के लिए घग्गर ब्रांच नहर में एक मोघा (आउटलेट) स्थापित किया था। पिछले 22 वर्षों से यह व्यवस्था बिल्कुल सही चल रही थी और खेतों को पर्याप्त पानी मिल रहा था। नौ महीने पहले बदला शेड्यूल तो मुसीबत पहले की व्यवस्था के अनुसार, नहर के मोघे से लगभग एक किलोमीटर लंबी 33 इंच की मुख्य पाइपलाइन से पानी आता था, जो आगे चलकर 18-18 इंच की दो अलग-अलग पाइपलाइनों के जरिए खेतों तक पहुंचता था। लेकिन करीब नौ महीने पहले नहर विभाग ने इस शेड्यूल में बदलाव कर दिया और 33 इंच के पाइप से केवल एक ही 18 इंच की पाइपलाइन में पानी चलाना शुरू किया। लीकेज के कारण नालियों में बह रहा पानी, ट्यूबवेल भी हुए नाकाम विभाग द्वारा किए गए इस तकनीकी बदलाव के बाद जवाहरवाला गांव के खेतों की तरफ जाने वाले पाइपों और पानी की टंकियों में जगह-जगह भारी लीकेज शुरू हो गई है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि नहर का कीमती पानी खेतों तक पहुंचने के बजाय नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है खराब पानी की दोहरी मार किसानों का कहना है कि उनके खेतों में लगे ट्यूबवेलों का पानी भी खेती के लिए उपयुक्त नहीं है। ऐसे में बिना नहरी पानी के फसलों की बिजाई और सिंचाई करना उनके लिए नामुमकिन होता जा रहा है। सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसान, समाधान नहीं परेशान किसान अपनी इस गंभीर समस्या को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है। संबंधित विभाग ने किसानों से वादा किया था कि 10 जून से पहले पानी की आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी, लेकिन यह समय सीमा बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की इस सुस्ती के कारण किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है।
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