लुधियाना कोर्ट में पेश हुआ असली हरविंदर: गुहार लगाई-मेरे दस्तावेजों से फर्जी किरायानामा बनाया, अदालत में याचिका लगाई; अब जान को खतरा – Ludhiana News
वाराणसी में फर्जी बिलिंग के जरिए सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाले केस में नया मोड़ आ गया। लुधियाना के चेत सिंह नगर में जिस हरविंदर के आधार कार्ड से किरायानामा बनाकर दफ्तर किराए पर लिया गया था, वो कोर्ट में पेश हो गया। हरविंदर सिंह ने कोर्ट से गुहार लगाई कि उसके नाम और दस्तावेजों से जो याचिका कोर्ट में दायर की गई और उस पर कोर्ट ने स्टे दिया है, उसे तुरंत खत्म किया जाए और उन लोगों से जवाब-तलबी की जाए जिन्होंने उसके नाम व दस्तावेजों का दुरुपयोग किया है। हरविंदर ने यह भी कहा कि अब उसे उन लोगों से जान का खतरा भी है जिन्होंने यह फ्रॉड किया है। एडवोकेट सर्वजीत सिंह ने बताया कि हरविंदर सिंह की अर्जी पर कोर्ट ने सर्च वारंट पर दी गई स्टे को खत्म कर दिया और याचिका दायर करने वाले एडवोकेट से इस मामले में जवाब मांगा है। एडवोकेट सर्वजीत सिंह का कहना है कि इस पूरे मामले में भारी फर्जीवाड़ा किया गया है। पहले वाराणसी में फर्जी कंपनी बनाई गई, फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लुधियाना के चेत सिंह नगर में दफ्तर किराए पर लिया गया और वहां से नेटवर्क चलाया गया। एडवोकेट सर्वजीत सिंह ने कोर्ट से अपील की है कि इस पूरे मामले की गहन जांच करवाई जाए ताकि इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो सके। उन्होंने बताया कि अगर यूपी पुलिस को समय पर सर्च करने दिया जाता, तो वहां से काफी अहम सबूत मिल सकते थे। उन्होंने कहा कि अब तो आरोपी वहां से सामान लेकर निकल चुके हैं। हरविंदर ने कोर्ट में दायर याचिका में क्या कहा, सिलसिलेवार जानिए: सर्च वारंट से लेकर स्टे तक की कहानी, जानिए… फेक कंपनियों से फर्जी बिलिंग का खेल यूपी स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट वाराणसी रेंज बी के अधिकारी कृपा कांत की शिकायत पर थाना चेतगंज (वाराणसी) में मुकदमा दर्ज कराया गया। टैक्स डिपार्टमेंट को जांच के दौरान एक फर्जी कंपनी M/s सोहन एंटरप्राइजेज का पता चला। इसके बाद फर्जी कंपनी के मालिक बिजनौर निवासी सोहन कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। वाराणसी के चेतगंज स्थित लहुराबीर दुकान नंबर 121 के पते पर M/s सोहन एंटरप्राइजेज (GSTIN: 09JQWPK7794A1ZW) नाम से एक कंपनी रजिस्टर कराई गई। कागजों में इस कंपनी का मालिक सोहन कुमार को दिखाया गया। FIR के मुताबिक 16 अप्रैल 2025 को जब टैक्स अधिकारी दुकान के पते पर जांच करने पहुंचे, तो बताए गए पते पर कोई कामकाज नहीं चल रहा था। दुकान का कब्जा पूरी तरह से फर्जी किराएनामे के आधार पर दिखाया गया था। मौके पर न तो कोई सामान था और न ही कोई कर्मचारी। कंपनी सिर्फ कागजों पर चल रही थी और कोई असली खरीद-बिक्री नहीं हो रही थी। जांच आगे बढ़ी तो कंपनी का आईपी एड्रेस लुधियाना के चेत सिंह नगर का निकला जो कि संदीप के नाम पर रजिस्टर्ड था। जांच और आगे बढ़ी तो पता चला कि चेत सिंह नगर के जिस घर में दफ्तर चलाया जा रहा था उसका किरायानामा हरविंदर के नाम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किया गया है। यूपी पुलिस सर्च करने आई और कोर्ट ने उन्हें अनुमति दी लेकिन सेशल कोर्ट में हरविंदर के नाम से एक याचिका दायर की गई और सर्च पर स्टे ले लिया गया। उसके बाद असली हरविंदर सामने आया और उसने अब कोर्ट में कहा कि किरायानामा में जो आधार लगा है वो उसका है और उस पर सिर्फ फोटो बदली गई है। इसके अलावा स्टे के लिए जो वकालतनामा या अन्य दस्तावेज हैं वो भी उसने नहीं दिए हैं।
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