नकोदर में पंजाबी-सूफी गायकों का संगम: अलमस्त बापू लाल बादशाह जी का मेला कल से, आज मेहंदी रस्म, खान साब व नूरा सिस्टर्स आएंगी – Nakodar News
ऐतिहासिक और सूफी नगरी नकोदर में स्थित विश्व प्रसिद्ध दरबार अलमस्त बापू लाल बादशाह जी का 43वां सालाना जोड़ मेला शनिवार, 18 जुलाई 2026 से पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ शुरू होने जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला यह महापर्व सांई हंस दरवेश जी की पावन छत्रछाया में 18, 19 और 20 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। मेले की पूर्व संध्या पर आज रात दरबार में बेहद श्रद्धापूर्वक पारंपरिक मेहंदी की रस्म अदा की जाएगी। मेले के तीनों दिन संगीत जगत के नामी कलाकार और सूफी गायक बापू जी के चरणों में अपनी हाजिरी लगाएंगे।दरबार प्रबंधक कमेटी ने समूह साध-संगत से अपील की है कि वे इन तीन दिनों के दौरान बड़ी संख्या में दरबार पहुंचकर बापू लाल बादशाह जी का आशीर्वाद प्राप्त करें और सूफियाना रूहानी महफिल का आनंद लें। कल झंडे की रस्म से होगा भव्य आगाज़ मेले की शुरुआत शनिवार (18 जुलाई) को झंडे की पावन रस्म के साथ होगी। इस ऐतिहासिक मेले में शामिल होने के लिए आज रात से ही देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालुओं (संगत) का नकोदर पहुंचना शुरू हो जाएगा। तीन दिवसीय मेले के दौरान देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालुओं के दरबार में नतमस्तक होने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दरबार प्रबंधक कमेटी द्वारा रहने-ठहरने और अटूट लंगर के विशेष व पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त; रूट डायवर्ट और पार्किंग स्थल तैयार श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए पुलिस और नागरिक प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। मेला परिसर और आसपास की सुरक्षा की निगरानी के लिए विशेष पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। डेरा स्थल की ओर जाने वाले सभी मुख्य रास्तों पर मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रखने के लिए किसी भी भारी या बड़े वाहन को डेरा स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं होगी। वाहनों के लिए प्रशासन ने बड़े व सुरक्षित पार्किंग स्थल तैयार किए हैं। दुल्हन की तरह सजी नकोदर नगरी मेले के उपलक्ष्य में पूरे दरबार साहिब और आसपास के करीब 3 से 4 किलोमीटर के क्षेत्र को रंग-बिरंगी आधुनिक लाइटों से सजाया गया है, जिससे रात का नजारा अलौकिक प्रतीत हो रहा है। मेला स्थल के पास सुंदर दुकानें सज चुकी हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए बड़े-बड़े झूले, खिलौनों के स्टॉल और लजीज व्यंजनों की दुकानें संगत के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। सूफियाना संगीत और कव्वाली से सजेगी महफिल प्रमुख सूफी व पंजाबी कलाकार: खान साब, फिरोज खान, गुलाब सिद्धू, कंठ कलेर, के.एस. मख्खन, बलराज बिलगा, जी-खान, दुर्गा रंगीला। नूरां सिस्टर्स व अन्य फनकार: ज्योति नूरां, सुल्ताना नूरां, माशा अली, हैप्पी रायकोटी, मनजीत सहोता, काशी नाथ, हरभी संघा, करामत अली, वनीत खान, औलख कोटी, इलाही सोहल, गुरमन मान, हरीश सोंधी और सन्नी मित्तल।
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