चंडीगढ़ डंपिंग ग्राउंड पर लगेगा का साइंटिफिक फायरवॉल: अब बिना टेस्टिंग के लैंडफिल में नहीं जाएगा कचरा, बनेगी हाईटेक एनवायरनमेंट लैब – Chandigarh News

चंडीगढ़ डंपिंग ग्राउंड पर लगेगा का साइंटिफिक फायरवॉल:  अब बिना टेस्टिंग के लैंडफिल में नहीं जाएगा कचरा, बनेगी हाईटेक एनवायरनमेंट लैब – Chandigarh News




डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड से उठने वाली बदबू, आग और प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे शहरवासियों अब राहत मिलेगी। चंडीगढ़ नगर निगम ने डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर साइंटिफिक वेस्ट मैनेजमेंट को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। निगम यहां 1.6 करोड़ रुपये की लागत से एनवायरनमेंट लैब बनाएगा। नगर निगम की जनरल हाउस बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस लैब के शुरू होने के बाद बिना जांच और बिना प्रोसेस किए गए कचरे को लैंडफिल साइट में डालने पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, नए रीजनल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर को मिली पर्यावरण मंजूरी की शर्तों के तहत इस प्रयोगशाला का निर्माण अनिवार्य किया गया है। नई व्यवस्था के तहत शहर से आने वाले गीले और सूखे कचरे को प्रोसेसिंग के बाद साइंटिफिक टेस्ट से गुजरना होगा। केवल वही अवशिष्ट कचरा (इनर्ट वेस्ट) लैंडफिल में डाला जाएगा, जो तय पर्यावरण मानकों पर खरा उतरेगा। मानकों को पूरा नहीं करने वाले कचरे को सीधे तौर पर अस्वीकार कर दिया जाएगा। NABL से मान्यता प्राप्त होगी लैब नगर निगम इस लैब को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज (NABL) से मान्यता दिलाएगा। लैब में ठोस कचरे, अपशिष्ट जल, जैविक तत्वों और इनर्ट मटेरियल की नियमित जांच की जाएगी, ताकि केंद्र सरकार के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। ग्राउंड की सबसे बड़ी समस्या कचरे से निकलने वाला जहरीला तरल पदार्थ लीचेट है, जो जमीन और ग्राउंडवॉटर को प्रदूषित करता है। नई लैब में लीचेट के प्रवेश और निकासी दोनों बिंदुओं पर लगातार जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आसपास के इलाके, मिट्टी और ग्राउंडवॉटर को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। इस प्रक्रिया से होंगे कई बड़े बदलाव इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब बिना प्रोसेस किया हुआ नगर निगम का कचरा सीधे डंपिंग ग्राउंड में नहीं डाला जा सकेगा। इसके अलावा गीले और सूखे कचरे के अवशेषों की रासायनिक और भौतिक जांच के बाद ही उन्हें लैंडफिल में भेजने की अनुमति दी जाएगी। कूड़े से निकलने वाले जहरीले तरल पदार्थ यानी लीचेट के रिसाव और बहाव पर भी लगातार निगरानी रखी जाएगी। साथ ही रासायनिक और प्रतिक्रियाशील कचरे को नियंत्रित कर ग्राउंडवॉटर और मिट्टी को प्रदूषण से बचाया जाएगा। वहीं लैब से तैयार होने वाली रिपोर्ट और डेटा सीधे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजे जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगी।



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