गुरदासपुर के 6 सरपंच सरकार को सौंपेंगे इस्तीफा: नेशनल हाईवे भी करेंगे बंद, मकौड़ा पत्तन पुल बहने से 7 गांवों का देश से कटा संपर्क – Batala News

गुरदासपुर के 6 सरपंच सरकार को सौंपेंगे इस्तीफा:  नेशनल हाईवे भी करेंगे बंद, मकौड़ा पत्तन पुल बहने से 7 गांवों का देश से कटा संपर्क – Batala News




मानसून की शुरुआत के साथ ही भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे गुरदासपुर के मकोड़ा पतन क्षेत्र में एक बार फिर संकट गहरा गया है। रावी दरिया पर बना अस्थायी पंटून पुल पानी के तेज बहाव में टूट कर बह गया है। इसके चलते रावी नदी के पार बसे 7 सीमावर्ती गांवों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट चुका है। प्रशासन के रवैये से नाराज रावी पार के 6 गांवों के सरपंचों ने अब पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर पक्के पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे सामूहिक इस्तीफा देंगे, नेशनल हाईवे जाम करेंगे और आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। टापू में तब्दील हुए सरहदी गांव, जान जोखिम में डालकर नाव का सहारा रावी नदी के पार और भारत-पाकिस्तान सीमा के बिल्कुल करीब बसे गांव तूर, भरियाल, मम्मियां, चिब्ब, चकरंगा, लसियां, कजले और चूंबर के लोगों के लिए बरसात का मौसम किसी अभिशाप से कम नहीं होता। एकमात्र सहारा भी छिना: पंटून पुल टूटने के बाद अब ग्रामीणों के पास आवाजाही के लिए सिर्फ और सिर्फ कश्ती ही एकमात्र जरिया बची है। टापू बने गांव: ग्रामीणों का कहना है कि जब रावी नदी में जलस्तर और ज्यादा बढ़ जाता है, तो सुरक्षा के लिहाज से नाव का संचालन भी बंद कर दिया जाता है। ऐसे में ये सभी गांव पूरी दुनिया से कटकर एक टापू में तब्दील हो जाते हैं।
ग्रामीणों का छलका दर्द स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि बरसात के इन दिनों में हमें ऐसा महसूस होता है जैसे हमारा इस देश से कोई संबंध ही नहीं है। न तो हमारे बच्चे स्कूल-कॉलेज जा पाते हैं और न ही बीमार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचाया जा सकता है। रोज़गार के लिए बाहर जाने वाले लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। केंद्र ने भेजा पैसा, पंजाब सरकार ने नहीं लगाया टेंडर इस पूरे गतिरोध को लेकर रावी पार के गांवों के सरपंचों ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरपंचों का कहना है कि इस पक्के पुल के निर्माण के लिए केंद्र सरकार की ओर से फंड (पैसे) जारी किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद, पंजाब सरकार की ढिलाई के कारण अभी तक इस प्रोजेक्ट का टेंडर नहीं लगाया गया है, जिससे पुल का निर्माण अधर में लटका हुआ है। अपनी मांगों को लेकर सभी गांवों के सरपंच गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर से मुलाकात करने जा रहे हैं, जहां वे प्रशासन को अपना अल्टीमेटम सौंपेंगे। सरपंचों का अल्टीमेटम: 10 दिन में काम शुरू न हुआ तो आर-पार की लड़ाई सरपंचों और ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे अब खोखले आश्वासनों से बहलने वाले नहीं हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ आर-पार के आंदोलन का बिगुल फूंकते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं: सामूहिक इस्तीफा: अगर अगले 10 दिनों के भीतर पक्के पुल के निर्माण का काम धरातल पर शुरू नहीं हुआ, तो सभी 6 गांवों के सरपंच पंजाब सरकार को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। चक्का जाम: ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर जम्मू-अमृतसर नेशनल हाईवे को पूरी तरह से जाम करेंगे। चुनाव का बहिष्कार: आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में इन गांवों का कोई भी नागरिक किसी भी राजनीतिक पार्टी को वोट नहीं देगा। हर साल बनते हैं ये हालात हर साल बरसात में देश की मुख्यधारा से कटने वाले इन सरहदी गांवों के लोगों का सब्र अब जवाब दे चुका है। सरपंचों ने कहा कि देश की सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति पर रहने वाले इन नागरिकों के बुनियादी हक (शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क) को लेकर अब गेंद पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन के पाले में है। देखना होगा कि प्रशासन 10 दिनों के इस अल्टीमेटम पर क्या कार्रवाई करता है।



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