कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की बेल पर सुनवाई टली: हाईकोर्ट ने ED से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, अगली तारीख पर होगी चर्चा, फिलहाल जेल में ही रहेंगे – Ludhiana News
पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई फिलहाल टाल दी है। हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी पर कोई भी फैसला सुनाने से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ा रुख दिखाते हुए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अब मामले की अगली तारीख पर ईडी अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी, जिसके बाद ही इस बात पर चर्चा होगी कि संजीव अरोड़ा को जमानत मिलेगी या उन्हें जेल में ही रहना होगा। अरोड़ा फिलहाल गुरुग्राम की जेल में बंद हैं, क्योंकि इससे पहले गुरुग्राम की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंडीगढ़ से हुई थी गिरफ्तारी संजीव अरोड़ा को ED ने इसी साल 9 मई को चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से दिनभर चली छापेमारी के बाद भ्रष्टाचार व मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद पंजाब सरकार ने उनके तमाम मंत्रालय दूसरे मंत्रियों को सौंप दिए थे। गुरुग्राम की अदालत से रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। अरोड़ा पर क्या हैं मुख्य आरोप, सिलसिलेवार जानिए.. 100 करोड़ का फर्जी GST घोटाला: ईडी की जांच के अनुसार, संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों पर मोबाइल फोन की खरीद-बिक्री में ₹100 करोड़ से अधिक का फर्जी जीएसटी (GST) घोटाला करने का आरोप है। फर्जी और शेल कंपनियां: जांच एजेंसी का दावा है कि हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड को माल की सप्लाई दिखाने के लिए दिल्ली और अन्य जगहों पर कई ऐसी फर्जी (शेल) कंपनियां कागजों पर खड़ी की गईं, जिनका असल में कोई वजूद ही नहीं था। यहां तक कि एक कंपनी का मालिक दिल्ली का एक दिहाड़ी मजदूर निकला, जिसे इस बारे में कुछ पता ही नहीं था। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और दुबई कनेक्शन: इन फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी बिल तैयार किए गए और सरकार से करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और ड्यूटी ड्रॉबैक का फायदा उठाया गया। आरोप है कि इस अवैध फंड को ‘राउंड-ट्रिपिंग’ के जरिए भारत से दुबई और फिर वापस भारत घुमाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सर्च में मिले पुख्ता सबूत: जांच एजेंसी ने पिछले दिनों पंजाब (लुधियाना, जालंधर) और उत्तर प्रदेश (नोएडा, बरेली) में अरोड़ा से जुड़े करीब 6 से ज्यादा ठिकानों पर फिर से ताबड़तोड़ छापेमारी की थी, जिसमें कई आपत्तिजनक डिजिटल दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड हाथ लगे हैं।
Source link

