उत्तराखंड के गुरुद्वारे से 4 दिन बाद पंजाब लौटे निहंग: कार्रवाई नहीं करने की शर्त पर नीचे उतरे, CM धामी से मिला था प्रतिनिधिमंडल – Rudraprayag News
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में 4 निहंग, पंजाब से आए जत्थे से मुलाकात करने के बाद चौथे दिन वापस लौट गए हैं। गुरुद्वारे की व्यवस्था फिर से संचालक बाबा बेअंत सिंह को सौंप दी गई है। निहंगों ने कहा कि गुरुद्वारे से जुड़ा विवाद आपसी बातचीत और प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया है। उत्तराखंड सरकार, प्रशासन, पुलिस और धार्मिक नेताओं ने मिलकर इसका समाधान निकाला है। हेमकुंड साहिब यात्रा पहले की तरह जारी रहेगी और किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। सरकार और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। उत्तराखंड सरकार के सामने हमने अपने साथियों पर कोई कार्रवाई नहीं करने की शर्त रखी थी, जिसे मान लिया गया है, जिसके बाद तीसरी मंजिल से हमारे साथी नीचे उतार आए। हालात संभालने के लिए पुलिस, ITBP और PAC के जवान पिछले कई दिनों से वहीं तैनात थे। मामले में रुद्रप्रयाग प्रशासन लगातार उनसे बातचीत कर रहा था। आज हालात में कुछ सुधार हुआ है। पहले जवानों की संख्या 25 से ज्यादा थी, जिसे अब घटाकर 15 से 20 कर दिया गया है। सुबह लंगर और अरदास भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी सीएम धामी से मिली घटनाक्रम के बीच पुलिस मुख्यालय ने दोनों पक्षों की FIR की जांच हरिद्वार ट्रांसफर कर दी है, जबकि सिख श्रद्धालुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच DIG स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। वहीं, आज सुबह देहरादून में कर्णप्रयाग विवाद के बीच दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मामले में सरकार के फैसलों का स्वागत किया। 16 जून से अब तक क्या-क्या हुआ, पढ़िए पूरी टाइमलाइन 1. 16 जून- कर्णप्रयाग बाजार में विवाद- हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे निहंग सिखों के एक जत्थे की बाइक कर्णप्रयाग बाजार में खड़ी कार से टकरा गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि कुछ निहंगों ने तलवार और धारदार हथियारों से हमला किया, जिसमें कई स्थानीय लोग घायल हुए। एक होटल व्यवसायी की हालत गंभीर होने पर उसे एयरलिफ्ट कर AIIMS ऋषिकेश भेजा गया। घटना के विरोध में स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने बद्रीनाथ हाईवे पर करीब पांच घंटे चक्काजाम किया। इससे गौचर से नंदप्रयाग तक लंबा जाम लग गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। 2. 20 जून- दूसरे पक्ष पर भी FIR- सिख समुदाय ने आरोप लगाया कि निहंगों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी, लेकिन केवल उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद घायल सिख श्रद्धालु के पिता की शिकायत पर 20 जून को अज्ञात लोगों के खिलाफ भी कर्णप्रयाग कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई। 3. 20 जून शाम- नगरासू गुरुद्वारे में बढ़ा विवाद- इसके बाद निहंग रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में ठहरे हुए थे। उनकी नाराजगी स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका को लेकर थी। शनिवार शाम विवाद बढ़ गया। आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार और एक बाबा के साथ मारपीट की व वहां मौजूद एक व्यक्ति को बंधक बना लिया। इसके बाद वे पारंपरिक शस्त्रों के साथ गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर चले गए और खुद को अंदर बंद कर लिया। 4. 21 जून- पुलिस घेराबंदी, आईटीबीपी तैनात- घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, पीएसी और आईटीबीपी को मौके पर तैनात किया गया। प्रशासन ने गुरुद्वारे को चारों ओर से घेर लिया। डीएम विशाल मिश्रा और एसपी निहारिका तोमर ने बातचीत की कोशिश की, लेकिन शुरुआती दौर में निहंगों ने वार्ता से इनकार कर दिया। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्रों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद की गईं। 5. 22 जून- बातचीत के बाद बंधक मुक्त- प्रशासन और निहंगों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। इसके बाद निहंगों ने बंधकों को मुक्त कर दिया। एक वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने उनका सहयोग किया है और वे सुरक्षित हैं। हालांकि कुछ निहंग अब भी गुरुद्वारे में डटे हुए हैं और अपने साथियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। 6. 23 जून- जांच हरिद्वार ट्रांसफर- आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया। कर्णप्रयाग में दर्ज दोनों एफआईआर की जांच चमोली से हरिद्वार ट्रांसफर कर दी गई है। इन मामलों की निगरानी एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर करेंगे ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जा सके। सिख संगठनों ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तार श्रद्धालुओं को बिना दस्तार अदालत में पेश किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। इन आरोपों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह चौहान को सौंपी गई है। उन्हें दो हफ्ते के अंदर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। 7. 27 जून तक धारा 163 लागू- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्णप्रयाग, चमोली और रुद्रप्रयाग के संवेदनशील इलाकों में बीएनएसएस की धारा 163 लागू की गई है, जो 27 जून तक प्रभावी रहेगी।
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