अमृतसर में अटारी-वाघा बॉर्डर के मार्ग 49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु अपनी लगभग एक महीने की धार्मिक यात्रा पूरी करने के पश्चात वतन लौट गए। ये श्रद्धालु पाकिस्तान के ननकाना साहिब और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं।

भारत में अपने प्रवास के बीच उन्होंने श्री हेमकुंट साहिब, श्री आनंदपुर साहिब, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब और दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेका। यात्रा पूरी करने के पश्चात अटारी बॉर्डर पर इमिग्रेशन और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें पाकिस्तान रवाना किया गया।

दरअसल, इन श्रद्धालुओं को वापसी हेतु हवाई मार्ग से जाना था। इस प्रक्रिया में कनेक्टिंग फ्लाइट और कागजी कार्रवाई की वजह से लगभग 22 से 24 घंटे का वक्त लग रहा था। इससे श्रद्धालुओं को काफी समस्या हो रही थी। उनकी इस परेशानी को देखते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने केंद्र सरकार से सड़क रास्ता से वापसी की अनुमति देने की अपील की थी।

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केंद्र सरकार ने दी सड़क रास्ता से लौटने की अनुमति

श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और उनकी दिक्कत को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान लौटने की अनुमति दे दी। इसके पश्चात समस्त 49 श्रद्धालु सड़क मार्ग से सुरक्षित अपने राष्ट्र पहुंच गए।

जत्थे में शामिल ननकाना साहिब के श्रद्धालु भूपिंदर सिंह ने कहा कि वे 30 दिन के वीजा पर भारत आए थे। इसी बीच श्री हेमकुंट साहिब और श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन करना उनके जीवन का यादगार अनुभव रहा। उन्होंने यात्रा के बीच किए गए प्रबंधों हेतु भारत सरकार, पाकिस्तान सरकार और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का धन्यवाद किया।

वहीं, वतन लौटते वक्त श्रद्धालुओं ने दोनों देशों की सरकारों से अपील की कि धार्मिक यात्राओं हेतु दोनों तरफ के रास्ते आसान किए जाएं। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार करतारपुर साहिब कॉरिडोर के जरिए भारतीय श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित गुरुधामों के दर्शन करते हैं, उसी प्रकार पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं को भी भारत के ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

दोनों देशों में अमन-शांति की अपील

श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह की पहल से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी भाईचारा और संबंध मजबूत होंगे। उन्होंने दोनों देशों में अमन-शांति बनाए रखने की भी अपील की।

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Source: Dianik Bhaskar