पंजाब लोक सेवा आयोग (PPSC) की ओर से आयोजित पंजाब सिविल सर्विस (PCS) मेन्स के नतीजे घोषित होते ही विवादों में घिर गए हैं। बुधवार (4 नवंबर) देर रात रिजल्ट आया। जिसके बाद एग्जाम देने वाले ,अभ्यर्थियों ने इसमें अनियमितताओं और धांधली के गंभीर आरोप लगाए है

परीक्षार्थियों के मुताबिक, जारी रिजल्ट में एक ही परीक्षा हॉल से 10 से 11 अभ्यर्थियों के चयन हुए हैं। वहीं, एक ही एग्जाम सेंटर से 24.21% अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट किए गए हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आंसरशीटों के मूल्यांकन में नियमों और पारदर्शिता को दरकिनार किया गया। इसके अतिरिक्त, विज्ञापित पदों की तुलना में निर्धारित 3 गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू हेतु नहीं बुलाया गया।

स्टूडेंट्स का इल्जाम है कि रिजल्ट में कई अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर भी दिख रहे हैं। इन तमाम विसंगतियों को लेकर अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पंजाब के मुख्यमंत्री और CBI को ज्ञापन सौंपकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं, संतोषजनक कार्रवाई न होने पर परीक्षार्थी प्रकरण हाईकोर्ट में ले जाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इसे लेकर स्टूडेंट्स चंडीगढ़ हाईकोर्ट पार्किंग में इकट्‌ठा हो रहे हैं।

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भाजपा ने इसे नीट पेपर लीक जैसा कांड बताया है। भाजपा के पूर्व पंजाब अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बताया है कि इस मामले की CBI छानबीन होनी चाहिए। यह कैसे संभव है कि चुनिंदा कमरे में बैठे बहुत से अभ्यर्थियों का सिलेक्शन हो जाए?

PCS के रिजल्ट पर स्टूडेंट्स ने उठाए ये 5 प्रश्न

  • एक ही क्लासरूम से 40% से ज्यादा का सिलेक्शन: स्टूडेंट्स के मुताबिक, रिजल्ट में सामने आया कि 4 अलग-अलग परीक्षा केंद्रों के 1-1 रूम से 10-10 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। सेंटर-7 के रूम 8 के 24 में से 11 प्रत्याशी (45.8%), सेंटर-11 के रूम नंबर 14 के 24 में से 10 उम्मीदवार (41.7%), सेंटर-4 के रूम नंबर 19 के 24 में से 10 उम्मीदवार (41.7%) शॉर्टलिस्ट किए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ही कमरे से इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का पास होना महज एक संयोग नहीं हो सकता।
  • केंद्रवार शॉर्टलिस्टिंग में भारी अंतर: विभिन्न सेंटरों के बीच चयन दर में भारी भिन्नता पाई गई है। जहां सेंटर-8 में कुल शार्टलिस्टिंग की दर 24.21% रही, वहीं सेंटर-1 के रूम नंबर 1 से 7 तक चयन दर महज 2.89% दर्ज की गई। जबकि, रूम नंबर-8 से 18 में अचानक बढ़कर 13.77% तक पहुंच गई।
  • सिक्वेंसियल रोल नंबरों की मौजूदगी: रिजल्ट में एक ही क्रम में आने वाले अर्थात लगातार रोल नंबर वालों का सिलेक्शन देखा गया है। अभ्यर्थियों का इल्जाम है कि रोल नंबर आवंटन सीटिंग प्लान के हिसाब से होता है। ऐसे में एक ही पंक्ति या क्रम के छात्रों का एक साथ चयनित होना निष्पक्षता पर शक पैदा करता है।
  • 3 गुना इंटरव्यू मानदंड का उल्लंघन: भर्ती नियमों के मुताबिक, कुल विज्ञापित पदों के मुकाबले 3 गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू हेतु बुलाना अनिवार्य होता है। हालांकि, अभ्यर्थियों का दावा है कि आयोग की ओर से जारी लिस्ट में शॉर्टलिस्ट किए गए विद्यार्थियों की संख्या तय अनुपात से काफी कम है, जिसके लिए कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। कुल 331 पदों हेतु 751 उम्मीदवारों को इंटरव्यू हेतु बुलाया गया है।
  • आंसरशीट स्टूडेंट्स से चेक करवाने का आरोप: छात्रों ने इल्जाम लगाया है कि आंसरशीटों का मूल्यांकन योग्य प्रोफेसरों या अनुभवी विषय विशेषज्ञों से कराने के बजाय यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों से कराया गया। इतना ही नहीं, यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों को यह पहले से मालूम था कि उन्हें मूल्यांकन हेतु कितनी आंसरशीटें आवंटित की जाएंगी। स्टूडेंट्स का कहना है कि समस्त एग्जाम सेंटर पटियाला में ही बनाना भी बड़े प्रश्न खड़े करता है।

PPSC की वेबसाइट पर जारी रिजल्ट में एक ही सिक्वेंस में सिलेक्ट स्टूडेंट्स के रोल नंबर दिख रहे

हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में स्टूडेंट्स

आयोग के रवैये और पारदर्शी डेटा उपलब्ध न कराने से नाराज अभ्यर्थियों ने अब कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। छात्रों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सरकार या आयोग जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, तो वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

PPSC सेक्रेटरी बोले- मैं कुछ नहीं बता सकता

इस मामले में PPSC के सेक्रेटरी एग्जाम व्योम भारद्वाज का कहना है कि वह इस बारे में कुछ भी नहीं बता सकते। उन्होंने बताया कि इसके लिए कमिशन के चेयरमैन से बात करनी होगी।

प्रकरण में राजनीति प्रारंभ, विपक्षी क्या कह रहे

भाजपा ने पूछा- इसमें और नीट पेपर लीक में क्या फर्क?

पंजाब भाजपा ने इसे नीट पेपर लीक जैसा जानकारी दी है। सीनियर नेता सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया पर लिखा- पहले नायब तहसीलदार की परीक्षा का पेपर लीक, फिर बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक और अब PPSC की मुख्य परीक्षा में कथित धांधली के जरिए PCS परीक्षा को हाईजैक किया। यह नीट पेपर लीक मामले से किस प्रकार अलग है? इसका फैसला पंजाब के युवा खुद करें।

उन्होंने लिखा- PPSC की मुख्य परीक्षा के घोषित परिणामों ने भगवंत मान सरकार के 'बिना पैसे, बिना सिफारिश नौकरी' देने के दावों की पोल खोल दी है। एक-एक परीक्षा कक्ष से 10 से 11 परीक्षार्थियों का चयन हो गया, जबकि रोल नंबरों की सीरीज में लगातार 3 या 4 उम्मीदवारों के समूहों के रूप में भी कुल 86 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। क्या रोल नंबर जारी करते वक्त ही यह पूरी सेटिंग कर ली गई थी? क्या कुछ खास चहेते उम्मीदवारों को सुनियोजित तरीके से लगातार रोल नंबर आवंटित किए गए थे?

जाखड़ ने लिखा- PCS जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में यह कैसे संभव है कि किसी विशेष परीक्षा केंद्र या कुछ चुनिंदा कमरों में बैठे परीक्षार्थियों में से एक-चौथाई का चयन हो जाए, जब तक कि इसके लिए कोई खास तरीका न अपनाया गया हो?

बिट्‌टू बोले- स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए

भाजपा के पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू ने कहा- भाजपा भगवंत मान सरकार के बिना सिफारिश और बिना रिश्वत नौकरियां देने के दावों के उलट, PPSC मेन्स नतीजों के सामने आए आंकड़े सीधे प्रश्न खड़े करते हैं। जहां सेंटर-8 में कुल शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21% रही, वहीं सेंटर-1 के कमरा नंबर 1 से 7 तक यह दर महज 2.89% दर्ज की गई। एक ही परीक्षा में केंद्रों के बीच इतना बड़ा अंतर पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाता है।

मंचों से मेरिट और पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब विशेष कमरों और खास सीरियल नंबरों से ही चयन निकलते हैं, तो यह मेहनती युवाओं के परिश्रम के साथ सीधा धोखा प्रतीत होता है। यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है, तो साक्षात्कार प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए, कॉपियों को सील किया जाए और पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र एजेंसी या CBI से पड़ताल कराई जाए।

वड़िंग ने पूछा- मान सरकार कब उत्तर देगी?

वहीं, पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बताया कि पंजाब PCS मेन्स 2026 के नतीजों ने पंजाब की भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भगवंत मान, क्या आपकी सरकार इन सवालों का जवाब देगी? मूल उत्तर पुस्तिकाओं, डिजिटल रिकॉर्ड और मूल्यांकन प्रक्रिया को सुरक्षित किया जाए और पूरी चयन प्रक्रिया का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। पंजाब के मेहनती युवाओं का हक किसी सिफारिश, रसूख या कथित धांधली की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। भगवंत मान, अब सवाल आपकी सरकार से है, उत्तर कब मिलेगा?

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Source: Dianik Bhaskar