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दिल्ली शराब घोटाला केस में केजरीवाल खुद पैरवी करेंगे: पिछली सुनवाई में जस्टिस स्वर्णकांता से केस से हटने की मांग की थी

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दिल्ली शराब घोटाला केस में केजरीवाल खुद पैरवी करेंगे:  पिछली सुनवाई में जस्टिस स्वर्णकांता से केस से हटने की मांग की थी


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नई दिल्ली31 मिनट पहले

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अरविंद केजरीवाल कोर्ट पहुंचे।

दिल्ली शराब घोटाला मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस दौरान दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल इस केस की जज स्वर्णकांता शर्मा से खुद को अलग (रिक्यूज) करने की मांग करेंगे। केजरीवाल खुद अपनी दलीलें रखेंगे। वे कोर्ट पहुंच गए हैं।

इससे पहले इस मामले में 6 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने CBI को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि अगर कोई जज को मामले से हटाने की मांग वाली अर्जी देना चाहता है, तो दे सकता है।

CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उसने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को शराब घोटाला केस में बरी कर दिया था।

इसी मामले में बुधवार को CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर अरविंद केजरीवाल की याचिकाओं का विरोध किया है। CBI ने कहा कि ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ (ABAP) के सेमिनार में शामिल होने का मतलब ये नहीं है की जस्टिस शर्मा का झुकाव किसी खास संगठन की तरफ है।

27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के बाहर बयान देते समय केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था।

ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।

ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है।

साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी।

केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे

दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।

इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।

इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।

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