दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर अफसरों को लाने और नियमित भर्ती की अनदेखी का खामियाजा चंडीगढ़ के स्वास्थ्य महकमा को भुगतना पड़ रहा है। विभाग के 319 पद समाप्त (लैप्स) हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें नर्सिंग, पैरामेडिकल और अन्य कर्मियों के

डायरेक्टर और रजिस्ट्रार के पद समाप्त

जीएमसीएच-32 में कुल 129 पद लैप्स हो चुके हैं। इनमें डायरेक्टर और रजिस्ट्रार जैसे अहम प्रशासनिक पदों के अलावा फैकल्टी और प्रोफेसर स्तर के 34 पद शामिल हैं। वहीं, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के 93 पद समाप्त हो चुके हैं। नियमित नियुक्तियां नहीं होने की वजह से दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर आए डॉक्टरों को महकमा प्रमुख और स्टोर इंचार्ज जैसे अहम प्रभार सौंपे जा रहे हैं। अस्पताल के अंदर अहम पदों और प्रभारों को लेकर लंबे समय से जोड़-तोड़ होने की भी चर्चा है।

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नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद खत्म

जीएमएसएच-16 में भी नियमित भर्ती नहीं होने की वजह से 190 पद लैप्स हो चुके हैं। इनमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 और डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ व मंत्रालयिक वर्ग के 131 पद शामिल हैं। कर्मियों का इल्जाम है कि चहेते अधिकारियों और कर्मियों को डेपुटेशन पर लाने के चक्कर में नियमित भर्ती की फाइलें लंबित रखी गईं। इसका असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ा है।

3 साल खाली रहने पर पद समाप्त

सरकारी नियमों के अनुसार, कोई पद लगातार तीन साल तक खाली रहने पर डीम्ड अबॉलिश्ड यानी समाप्त माना जाता है। इसके पीछे तर्क यह है कि यदि बिना नियमित नियुक्ति के तीन वर्ष तक कामकाज चलता रहा तो माना जाता है कि उस पद की जरूरत नहीं है। इसी नियम के चलते दोनों अस्पतालों के कुल 319 पद खत्म हो गए।

भर्ती नहीं होने के 3 बड़े कारण…

  • सिफारिशों का अभाव: डेपुटेशन पर रिक्त पद भरने हेतु पंजाब और हरियाणा से यूटी प्रशासन को वक्त पर चिकित्सा अधिकारियों की सिफारिशें नहीं मिलीं।
  • ओबीसी नीति का पेंच: चंडीगढ़ प्रशासन की ओबीसी श्रेणी नीति की वजह से यूपीएससी इस वर्ग हेतु भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका।
  • आरआर में संशोधन लंबित: मार्च 2023 से केंद्रीय वेतनमान लागू होने के पश्चात भर्ती तथा सेवा नियमों (आरआर) में जरूरी बदलाव लंबे वक्त तक अटके रहे।

स्वास्थ्य मंत्रालय के फैसले का इंतजार

जीएमएसएच-16 के समाप्त हुए 190 पदों को दोबारा बहाल करने के प्रस्ताव को वित्त महकमा से मंजूरी मिल चुकी है। इसमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 और पैरामेडिकल व मंत्रालयिक वर्ग के 131 पद शामिल हैं। अब समस्त खत्म पदों को दोबारा जीवित करने हेतु प्रकरण स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के पश्चात ही इन पदों को बहाल करने और नियमित भर्ती का रास्ता साफ होगा।

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Source: Dianik Bhaskar