मेघालय की राजधानी शिलांग में हनीमून के दौरान पति की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम 320 दिनों बाद जेल से बाहर आ गई। बीते सात महीनों में उसने चार बार जमानत मांगी। पहली तीन अर्जी खारिज हुईं, लेकिन चौथी में कानूनी ‘लूपहोल’ (तकनीकी खामी) के आधार पर स
भास्कर की स्टडी में सामने आया कि बचाव पक्ष ने ‘प्रेम प्रसंग’ की थ्योरी को ‘भाई-बहन’ के रिश्ते में बदलने और आखिर में प्रक्रियात्मक चूक को ढाल बनाया। सिलसिलेवार जानिए कैसे मिली जमानत…
सोनम की पहली जमानत अर्जी चार्जशीट के साथ दाखिल हुई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। दूसरी अर्जी में जोर इस बात पर था कि पुलिस के पास ठोस सबूत नहीं है। 15 अक्टूबर 2025 की सुनवाई में बचाव पक्ष ने चार तर्क रखे…
- परिस्थितिजन्य साक्ष्य: वकील ने कहा कि केस केवल ‘सर्कमस्टेंशियल एविडेंस’ पर टिका है। कोई चश्मदीद गवाह नहीं है।
- संदेह बनाम प्रमाण: कोर्ट में कहा गया कि सोनम के खिलाफ केवल संदेह है। कानूनन संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता।
- लंबा ट्रायल: पुलिस 5 सितंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी। बचाव पक्ष ने कहा कि 90 गवाह और 180 दस्तावेज होने से ट्रायल लंबा चलेगा। ऐसे में ‘दोष सिद्ध होने तक निर्दोष’ के सिद्धांत के तहत जेल में रखना अनुचित है।
- मीडिया ट्रायल: कहा गया कि मीडिया कवरेज से परिवार सामाजिक और मानसिक दबाव में है।
हालांकि, कोर्ट ने तर्क खारिज किए। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया सोनम की संलिप्तता दिखती है और बाहर आने पर उसके भागने की आशंका है।

दो महीने बाद, 17 दिसंबर 2025 को सोनम ने फिर जमानत मांगी। इस बार बचाव पक्ष ने नया ‘इमोशनल एंगल’ पेश किया।
- प्रेमी नहीं, भाई था राज: पुलिस जिस राज कुशवाहा को प्रेमी बता रही थी, उस पर फैक्ट्री कर्मचारी प्रियांशी जैन ने कोर्ट में कहा कि दोनों के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता था। सोनम उसे राखी बांधती थी और राज उसे ‘दीदी’ कहता था। इससे ‘प्रेम प्रसंग’ की थ्योरी को कमजोर करने की कोशिश की गई।
- शादी की खुशी: कहा गया कि सोनम शादी से खुश थी। उसने शॉपिंग की और सभी रस्मों में उत्साहित थी। ऐसे में हत्या का कोई मकसद नजर नहीं आता।
- जेल अपवाद, जमानत नियम: वकील ने दोहराया कि ‘जमानत एक नियम है और जेल अपवाद’। उन्होंने सामाजिक बदनामी और पुतला जलाने की घटनाओं का हवाला दिया।
लेकिन, कोर्ट ने इस बार भी अपराध की गंभीरता देखते हुए सोनम को राहत नहीं दी।

तीन बार नाकाम होने के बाद, चौथी अर्जी में सोनम की टीम ने कानूनी प्रक्रिया की बड़ी खामी पकड़ी।
- गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई: इस बार कहा गया कि 7 जून 2025 को गाजीपुर से गिरफ्तारी के समय सोनम को ‘गिरफ्तारी की ठोस वजह’ नहीं बताई गई थी, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
- अधूरा अरेस्ट फॉर्म: गिरफ्तारी के समय भरे फॉर्म में चेक बॉक्स खाली थे। यह स्पष्ट नहीं था कि किन धाराओं में हिरासत में लिया गया।
- धाराओं का घालमेल: केस डायरी और गिरफ्तारी के कागजों में अंतर मिला। मामला धारा 103(1) का था, लेकिन कई दस्तावेजों में 403(1) दर्ज था।
- वकील की अनुपस्थिति: रिकॉर्ड में कोई प्रमाण नहीं मिला कि गाजीपुर में पहली पेशी के दौरान सोनम के पास वकील था।
- ट्रायल लंबा खिंचेगा: वकील ने कहा कि 10 फरवरी 2026 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हुई, जिसमें दो आरोपियों के नाम हटाए गए। अब सुनवाई और आरोप तय करने की प्रक्रिया नए सिरे से होगी, जिससे ट्रायल लंबा खिंचेगा।
- सोनम प्रतिष्ठित परिवार से: वकील ने कहा कि सोनम इंदौर के बड़े कारोबारी परिवार से हैं। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए फरार होने का खतरा नहीं है।
इन तर्कों पर अदालत ने रिकॉर्ड खंगाला, तो पुलिस की लापरवाही सामने आई। कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में कई तकनीकी खामियां थीं। अनुच्छेद 22(1) के तहत अदालत ने कहा कि हर नागरिक को गिरफ्तारी का कारण तुरंत बताना जरूरी है। ऐसा न होने पर बचाव का अधिकार प्रभावित होता है। इसी आधार पर सोनम को सशर्त जमानत दे दी गई।

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