Home Bharat लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा: पास होने...

लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा: पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम

3
0
लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा:  पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम


नई दिल्ली16 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था।

लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े।

बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया।

12 साल के शासन में यह पहला मौका था, जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। अब महिला आरक्षण नई जनगणना के नतीजे आने से पहले लागू नहीं होगा, यानी 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका फायदा नहीं मिलेगा।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए

पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026

दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026

सरकार ने इन पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दोनों पहले बिल से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर अलग से वोटिंग कराने की जरूरत नहीं है।

तीन बिल, जिनके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया

NDA के पास 298 सांसद, चाहिए 352 थे

बिल पर 528 सांसदों ने वोट किया। इसका दो तिहाई 352 होता है, लेकिन बिल के समर्थन में 298 वोट ही मिले। NDA के पास 293 सांसद हैं। भाजपा सिर्फ 5 अन्य सांसदों को कन्वेंस कर पाई। बाकी विपक्ष को विश्वास में लेने में सफल नहीं हुई, इसलिए बिल पास नहीं करा पाई।

24 साल बाद कोई सरकारी बिल गिरा

  1. 2002 के आतंकवाद निवारण बिल (पोटा) के बाद संसद में पराजित होने वाला पहला सरकारी विधेयक है।
  2. 1990 के संविधान (64वां संशोधन) बिल के बाद लोकसभा में गिरने वाला पहला संविधान संशोधन विधेयक है।

महिला आरक्षण और परिसीमन का कनेक्शन

सरकार ने लोकसभा में तीन बिल पेश किए थे। इसमें संविधान (131वां) संशोधन बिल, परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 शामिल थे। महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी। हालांकि यह अब 2034 तक लागू होगा।

इसके लिए परिसीमन की जरूरत है। परिसीमन का मतलब है कि देश की आबादी के आधार पर लोकसभा और विधानसभा की सीटों की सीमाएं और संख्या तय करना। यह काम एक परिसीमन आयोग करता है। पहले तय होगा कि किस राज्य में कितनी सीटें होंगी। किन इलाकों की सीमाएं क्या होंगी। उसके बाद ही आरक्षण तय हो पाएगा।

संसद का घटनाक्रम, उसका असर और आगे के एक्शन को 5 सवाल-जवाब से समझिए…

1. अब महिला आरक्षण का क्या होगा

2023 में बना और 16 अप्रैल 2026 को नोटिफाई किया गया महिला आरक्षण कानून लागू रहेगा। लेकिन महिलाओं को इसका फायदा 2034 के लोकसभा चुनाव से मिलेगा। इसके लिए 2027 में पूरी होने वाली जनगणना के मुताबिक परिसीमन जरूरी होगा। पढ़ें पूरी खबर…

भाजपा आगामी चुनावों में विपक्षी पार्टियों के महिला विरोधी होने का मुद्दा उठाएगी। तमिलनाडु में स्टालिन और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बिल के खिलाफ वोटिंग करने के लिए घेरा जा सकता है।

2. अगर बिल पास हो जाता तो क्या होता?

सरकार ने कहा कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटें 50% बढ़ जातीं। बढ़ी सीटों के हिसाब से महिलाओं को 33% आरक्षण मिलता। जैसे– यूपी में अभी 80 लोकसभा सीटें हैं। बिल पास होने के बाद यह 120 हो जातीं, जिनमें से 40 महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं।

3. अब सरकार के सामने क्या विकल्प हैं?

सरकार बिल में कुछ बदलाव कर सकती है। जैसे- दक्षिणी राज्यों की सीटें बढ़ाने का प्रावधान।

परिसीमन के लिए 2011 की बजाय 2027 की जनगणना का आधार बनाएगी।

नए सिरे से बिल पेश कर सकती है, जिस पर विपक्ष के सुझाव लेकर सहमति बना सकती है।

4. विपक्ष के विरोध की असली वजह क्या है?

विपक्ष ने महिला आरक्षण संशोधन बिल का विरोध नहीं किया लेकिन इससे जुड़े दोनों बिल के खिलाफ ही। विपक्ष ने परिसीमन बिल के विरोध के दो कारण बताए। पहला– इससे दक्षिणी राज्यों की संसद में ताकत कम हो जाएगी। दूसरा– यह ओबीसी और एसटी–एससी तबके के खिलाफ है।

5. परिसीमन विवाद: दक्षिण vs उत्तर का मुद्दा क्यों बना?

चर्चा के दौरान विपक्ष आरोप लगा रहा था कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों को फायदा होगा, जबकि दशकों से जनसंख्या वृद्धि में अंतर की वजह से दक्षिणी राज्य पीछे रह जाएंगे। हालांकि अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि, इस पर भ्रम फैलाया जा रहा है।

शाह ने कहा कि दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी।

संसद में बिल पर चर्चा के दौरान किसने क्या कहा

पीएम मोदी बोले- हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।

प्रियंका गांधी ने कहा, जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे। मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है।

राहुल गांधी ने कहा– चुनावी नक्शा बदलने के लिए महिला आरक्षण का सहारा लिया। सच यह है कि जादूगर पकड़ा गया है। बालाकोट, नोटबंदी और सिंदूर का जादूगर पकड़ा गया है। बिल गिरने के बाद उन्होंने कहा, ‘संशोधन बोल गिर गया। उन्होंने संविधान तोड़ने के लिए महिलाओं के नाम पर असंवैधानिक चाल चली। भारत ने इसे देख लिया। इंडिया (गठबंधन) ने इसे रोक दिया। संविधान की जय हो।’

अमित शाह ने बिल गिरने के बाद कहा- महिला आरक्षण बिल खारिज करना, उस पर जश्न मनाना, जीत के नारे लगाना वास्तव में निंदनीय व कल्पना से परे है।

अखिलेश यादव ने कहा- ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले।

विपक्ष ने कहा- हमने संविधान पर हमले को हरा दिया

राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।

प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।

शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।

संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की 2 तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा; मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की

सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।

पीएम की 3 अपील

13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।

16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’

17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी

17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

महिला आरक्षण पर संसद सत्र से जुड़ी इन खबरों से भी गुजर जाइए…

1. PM ने दोस्त कहा तो अखिलेश ने हाथ जोड़ लिए; संसद के टॉप-8 मोमेंट्स

2. शाह ने समझाया- कैसे लोकसभा की सीटें 850 होंगी

3. मोदी बोले- विपक्ष क्रेडिट ले, ब्लैंक चेक देने को तैयार



Source link

    Previous articleखबर हटके- शनि देव की आंखों पर पट्टी बांधकर चोरी: खुद को जिंदा साबित करने को कफन ओढ़ा; स्कूल ने टीचर को निकाला, अब ₹1.85 करोड़ देगा
    Next articleचारधाम यात्रा आज से, 18.25 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया: 19 अप्रैल को यमुनोत्री-गंगोत्री के कपाट खुलेंगे; ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन काउंटर भी शुरू

    Leave a Reply