प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 अप्रैल को बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। मारवाड़ सहित पूरे राजस्थान के लिए रिफाइनरी के अलग मायने हैं। प्रोजेक्ट से बाड़मेर-जैसलमेर में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स व सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही रिफाइनरी के पहले चरण के ट्रायल रन (कच्चे तेल का प्रसंस्करण) की तैयारी शुरू कर दी गई थी। इसमें जल्द कमर्शियल उत्पादन शुरू हो जाएगा। मोदी 2 महीने में दूसरी बार राजस्थान आ रहे हैं। पीएमओ से मंजूरी मिलने के बाद सीएम भजनलाल शर्मा ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट करके इस बात की जानकारी दी है। रिफाइनरी का दो बार हुआ शिलान्यास पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास पहली बार 22 सितंबर 2013 को हुआ था। उस समय तत्कालीन यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रिफाइनरी का शिलान्यास किया था। प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 37,230 करोड़ थी। सत्ता परिवर्तन के बाद रिफाइनरी की शर्तों में बदलाव के बाद पीएम मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से इसके कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया। इस समय इसकी लागत बढ़कर 43 हजार 129 करोड़ रुपए हो गई थी। इसका काम 31 अक्टूबर 2022 तक पूरा किया जाना था, लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार के समय 2 जून 2023 को परियोजना की लागत बढ़कर 72,937 करोड़ रुपए हो गई। भजनलाल सरकार में कंपनी ने 24 जुलाई 2025 को रिफाइनरी के लागत मूल्य में द्वितीय संशोधन प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत किया। इसके बाद इसकी लागत बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ रुपए हो गई है। रिफाइनरी एचपीसीएल और राजस्थान सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है। 28 फरवरी को अजमेर आए थे मोदी इस साल की बात करें तो पीएम मोदी पिछले दो महीने में दूसरी बार राजस्थान आ रहे हैं। इससे पहले मोदी 28 फरवरी 2026 को अजमेर दौरे पर आए थे। यहां उन्होंने अजमेर के कायड़ विश्राम स्थली से प्रदेश में 16,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया था और 21 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। बीएस-6 मानक और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज रिफाइनरी पचपदरा रिफाइनरी देश की सबसे आधुनिक बीएस-6 मानक की रिफाइनरी है। यहां रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल प्लांट एक साथ विकसित किए जा रहे हैं। यह पूरी तरह से जीरो लिक्विड इफ्लूएंट डिस्चार्ज परियोजना है, यानी क्रूड ऑयल रिफाइनिंग के दौरान किसी भी तरह का तरल कचरा बाहर नहीं जाएगा। यह पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 9 मिलियन टन रिफाइन क्षमता, अरब देशों से आएगा क्रूड पचपदरा रिफाइनरी की सालाना रिफाइनिंग क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल की है। साथ ही यहां 2 मिलियन टन क्षमता का पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स भी स्थापित किया गया है। रिफाइनरी के लिए कुल 7.5 मिलियन टन कच्चा तेल अरब देशों से मंगाया जाएगा, जबकि प्रदेश में उत्पादित करीब 1.5 मिलियन टन कच्चे तेल का भी उपयोग किया जाएगा। 12 किमी नई रेल लाइन बिछेगी करीब 80 हजार करोड़ रुपए की लागत से बन रही इस रिफाइनरी से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। क्रूड ऑयल रिफाइनिंग और बायो-प्रोडक्ट्स के उत्पादन से माल ढुलाई भी बढ़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए बालोतरा से पचपदरा के बीच बंद पड़ी रेल लाइन को दोबारा शुरू करने की तैयारी है। कुछ महीने पहले ही इसका सर्वे हुआ था। बालोतरा से पचपदरा और रिफाइनरी साइट तक करीब 12 किलोमीटर लंबी नई रेलवे लाइन एचआरआरएल की ओर से बिछाई जाएगी।
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