मोहाली में रवनीत बिट्टू के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा: पुलिस बदसलूकी के विरोध में पुतला फूंका, केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी – Mohali News

मोहाली में रवनीत बिट्टू के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा:  पुलिस बदसलूकी के विरोध में पुतला फूंका, केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी – Mohali News




पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और किसान संगठनों के बीच का गतिरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। बुधवार को मोहाली के जीरकपुर में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ किसान और मजदूर संगठनों ने रोष प्रदर्शन किया। किसान संगठनों ने नूर ढाबा से लेकर पटियाला चौक तक पैदल मार्च निकाला और केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू का पुतला फूंककर जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल), कुल हिंद किसान सभा, जमहूरी किसान सभा, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) डेराबस्सी ने आदि ने भागीदारी की। इस विशाल रोष मार्च में मनप्रीत सिंह अमलाला, विनोद चुघ, रणजीत सिंह राणा, जगतार सिंह झरमरी, गुरप्रीत सिंह जस्ताना कला, गुरविंदर सिंह और अवतार सिंह आदि किसान मजदूर नेता मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों से बदसलूकी का आरोप, कानूनी कार्रवाई की मांग नेताओं ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर गंभीर आरोप लगाए। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने पुलिस अधिकारियों, विशेषकर एसएचओ (SHO) करणवीर सिद्धू और एक महिला एसपी (SP) के साथ हाल ही में बदसलूकी की और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने इस व्यवहार को ‘बेहद निंदनीय’ और अलोकतांत्रिक करार दिया। नेताओं ने पंजाब सरकार से मांग की है कि इस मामले का तुरंत और गंभीरता से संज्ञान लिया जाए, ताकि ड्यूटी पर तैनात संबंधित अधिकारियों को न्याय मिल सके और केंद्रीय मंत्री के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। केंद्र की नीतियों और बढ़ती महंगाई पर भी बरसे नेता किसान नेताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में लगातार लागू की जा रही किसान और मजदूर विरोधी नीतियों के कारण जनता में भारी रोष है। राजनेताओं द्वारा पुलिस प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने देश में लगातार बढ़ रही महंगाई और डीजल-पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महंगे ईंधन और खेती की बढ़ती लागत के कारण आम लोगों, किसानों और मजदूरों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। सरकार को कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के बजाय आम जनता को तुरंत आर्थिक राहत देनी चाहिए



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