पठानकोट में आशा वर्कर्स का सिविल सर्जन कार्यालय पर धरना: लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, आर्थिक शोषण का आरोप – Pathankot News
पठानकोट में आशा वर्कर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जिले भर से सैकड़ों महिला आशा वर्कर्स ने पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने विभाग के रवैये को लेकर नारेबाजी की और सिविल सर्जन को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। यूनियन नेताओं ने पंजाब सरकार व जिला प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो यह आंदोलन केवल सिविल सर्जन कार्यालय तक सीमित नहीं रहेगा। स्वास्थ्य योजनाओं घर घर पहुंचाती हैं बदले में आर्थिक शोषण प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही यूनियन की पदाधिकारियों ने कहा कि आशा वर्कर्स स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं। वे जमीनी स्तर पर गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की देखभाल करती हैं, साथ ही सरकार की हर स्वास्थ्य योजना को घर-घर पहुंचाती हैं। इसके बावजूद सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और मामूली भत्ते पर उनसे दिन-रात काम लिया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक शोषण हो रहा है। आशा वर्कर्स की मुख्य मांगों में उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना और कम से कम 26,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन प्रदान करना शामिल है। स्मार्ट फोन और डेटा भत्ता देने की मांग इसके अतिरिक्त, उन्होंने ऑनलाइन काम के लिए अच्छे स्मार्टफोन और हर महीने मुफ्त इंटरनेट डेटा भत्ता देने की मांग की। अन्य मांगों में पिछले कई महीनों से रोके गए विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के इंसेंटिव का तुरंत भुगतान करना, ड्यूटी के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना और उचित स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना शामिल है। राज्य स्तर पर आंदोलन चलाने की चेतावनी उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं का पूरी तरह बहिष्कार कर राज्य स्तर पर संघर्ष को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस रोष प्रदर्शन में फील्ड से आईं भारी संख्या में आशा वर्कर्स और आशा फैसिलिटेटर्स मौजूद रहीं।
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