फरीदकोट में LADC समर्थन पर 3 वकीलों पर कार्रवाई: बार एसोसिएशन ने चैंबरों पर ताले जड़े, सदस्यता से भी निलंबित, अध्यक्ष बोले- नियमानुसार एक्शन – Faridkot News

फरीदकोट में LADC समर्थन पर 3 वकीलों पर कार्रवाई:  बार एसोसिएशन ने चैंबरों पर ताले जड़े, सदस्यता से भी निलंबित, अध्यक्ष बोले- नियमानुसार एक्शन – Faridkot News




फरीदकोट में जिला बार एसोसिएशन ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) नीति के विरोध के बीच बड़ा कदम उठाया है। एसोसिएशन ने एलएडीसी के तहत काम कर रहे तीन वकीलों से उनके चैंबर वापस ले लिए हैं। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने इन चैंबरों पर अपने ताले लगा दिए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि इन चैंबरों को जल्द ही अन्य वकीलों को आवंटित किया जाएगा। एलएडीसी नीति के विरोध में जिला बार एसोसिएशन की हड़ताल पिछले 19 दिनों से जारी है, जबकि क्रमिक भूख हड़ताल सातवें दिन में प्रवेश कर गई है।
कानूनों के जरिए न्याय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरजगपाल सिंह बराड़ ने कहा कि केंद्र सरकार ने नए आपराधिक कानूनों के जरिए न्याय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) के रूप में नियुक्त वकीलों ने इस नीति का समर्थन किया है। इसी कारण ऐसे वकीलों से चैंबर वापस लेने के साथ-साथ उनकी बार एसोसिएशन की सदस्यता भी निलंबित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई है। उनके अनुसार, किसी सरकारी नौकरी पर नियुक्त वकील को न तो चैंबर दिया जाता है और न ही बार एसोसिएशन की सदस्यता जारी रहती है। वकीलों ने ऐलान किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे सुप्रीम कोर्ट के बाहर भी शांतिपूर्ण धरना देंगे। काउंसिलों के अस्तित्व पर खतरा इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल को भी जानकारी दे दी गई है। बार एसोसिएशन के नेताओं सिमर विजय सिंह, विपन तायल, सरनाम सिंह, मीर सिंह सेखों, नवजोत सिंह वैहणीवाल और अविनाश कौर ने कहा कि नए कानून जनविरोधी हैं। उनका आरोप है कि इनके लागू होने से न्यायिक व्यवस्था के साथ-साथ देशभर की बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है। जल्द ही इस मामले का समाधान निकल सकता है बार काउंसिल पंजाब के सदस्य हरप्रीत सिंह मुल्तानी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी बातचीत हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस मामले का समाधान निकल सकता है। धरने को एडवोकेट गुरताज सिंह संधू, जीवनजोत कौर, बिक्रमजीत सिंह बराड़, राजिंदर सिंह रोमाणा, विनोद कुमार मोंगा और कुलिंदर सिंह सेखों ने भी संबोधित किया।



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