आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी हिंदू महिला को माता-पिता से विरासत में संपत्ति मिली है और उसकी मौत बिना संतान, वसीयत किए बिना ही हो जाती है, तो उस संपत्ति पर पति-ससुराल का कानूनी हक नहीं होगा। ऐसी संपत्ति महिला के पिता के कानूनी वारिसों को जाएगी। जस्टिस तारलाडा राजशेखर राव ने कहा, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(2)(ए) साफ बताती है कि अगर महिला को पिता या मां से संपत्ति मिली हो और उसकी कोई संतान न हो, तो उसकी मौत के बाद वह संपत्ति पिता के वारिसों को जाएगी। पति को उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं मिलेगा। महिला की नानी की वसीयत को लेकर विवाद एक महिला ने 2002 में अपनी संपत्ति पहली नातिन को गिफ्ट की, जिसकी 2005 में संतानहीन मृत्यु हो गई। इसके बाद नानी ने पुराना गिफ्ट रद्द कर संपत्ति दूसरी नातिन के नाम वसीयत कर दी। 2012 में दादी के निधन के बाद दूसरी नातिन ने राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का आवेदन किया। आरडीओ ने उसके पक्ष में आदेश दिया, लेकिन मृत नातिन के पति ने इसे चुनौती दी। जॉइंट कलेक्टर ने आरडीओ का फैसला पलटते हुए पति के पक्ष में म्यूटेशन का निर्देश दिया और कहा कि शुरुआती गिफ्ट डीड रद्द करना कानूनी रूप से वैध नहीं था। इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- पति की आय बढ़ा-चढ़ाकर बताना ‘झूठा’ नहीं पारिवारिक विवाद से जुड़े ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भरण-पोषण (मेंटेनेंस) के मामलों में पत्नी का पति की आय बढ़ाकर बताना आम बात है। सिर्फ इसी आधार पर पत्नी के खिलाफ झूठा बयान देने (परजरी) की कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने पत्नी पर कार्रवाई की मांग की थी।
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