यूथ अकाली दल मानसा के प्रधान ने दिया इस्तीफा: हलका इंचार्ज प्रेम अरोड़ा पर टकसाली कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप – Mansa News
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को मानसा जिले में उस समय एक बड़ा संगठनात्मक झटका लगा, जब यूथ अकाली दल मानसा के जिला शहरी प्रधान हनीश बंसल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपने इस्तीफे का एलान कर दिया। बंसल ने हलका मानसा के इंचार्ज प्रेम कुमार अरोड़ा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर पुराने व टकसाली कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने और उन्हें अपमानित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस्तीफे की घोषणा करते हुए हनीश बंसल ने बताया कि वे साल 2014 से लगातार शिरोमणि अकाली दल के साथ जुड़े हुए हैं। इस लंबे सफर के दौरान उन्होंने पार्टी की मजबूती के लिए विभिन्न पदों पर रहते हुए पूरी निष्ठा के साथ काम किया। वर्तमान में संगठन ने उन्हें यूथ अकाली दल का जिला शहरी प्रधान नियुक्त किया हुआ था। 12 साल पुराना नाता टूटा, पार्टी में अनदेखी से थे परेशान बंसल ने भावुक और तीखे लहजे में कहा, “पिछले कुछ समय से मुझे पार्टी के किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम, महत्वपूर्ण बैठक या स्थानीय आयोजन की न तो कोई जानकारी दी जा रही थी और न ही आमंत्रित किया जा रहा था। मुझे और मेरे जैसे कई वफादार कार्यकर्ताओं को लगातार नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” हल्का इंचार्ज पर ‘पैसों और रसूख’ के दम पर राजनीति करने का आरोप हनीश बंसल ने सीधे तौर पर हल्का इंचार्ज प्रेम कुमार अरोड़ा पर निशाना साधते हुए कहा कि अरोड़ा अपने पैसे और प्रभाव का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “हल्का इंचार्ज बादल परिवार के करीबी कुछ लोगों के माध्यम से जमीनी और टकसाली कार्यकर्ताओं का अपमान करवा रहे हैं। आज पार्टी में योग्यता, समर्पण और वफादारी की कोई कद्र नहीं बची है, बल्कि निजी स्वार्थों और चाटुकारिता को ध्यान में रखकर पद बांटे जा रहे हैं।” बंसल ने आगे कहा कि प्रेम कुमार अरोड़ा शिरोमणि अकाली दल को मजबूत करने के बजाय केवल अपनी एक निजी और वफादार टीम तैयार करने में मशगूल हैं, जिससे पार्टी का भारी नुकसान हो रहा है। वरिष्ठ नेताओं ने भी नहीं की सुनवाई, दूसरी पार्टियों से सांठगांठ का दावा पार्टी छोड़ने की वजह साफ करते हुए हनीश बंसल ने बताया कि उन्होंने हल्का इंचार्ज के इस तानाशाही रवैये और कार्यकर्ताओं की दुर्दशा को लेकर कई बार पार्टी की सीनियर लीडरशिप तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि शीर्ष स्तर पर भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी निराशा के चलते उन्होंने आखिरकार पार्टी को अलविदा कहने का मन बनाया। इसके साथ ही बंसल ने एक और बड़ा राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि अकाली दल के कुछ स्थानीय नेता पर्दे के पीछे से अन्य विरोधी राजनीतिक दलों के साथ कथित रूप से सांठगांठ कर रहे हैं और अपने निजी हित साध रहे हैं। इसके बावजूद हाईकमान उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले रहा है, जबकि दशकों से खून-पसीना बहाने वाले वफादार कार्यकर्ताओं के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है।
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