वक्फ बोर्ड विवाद में भोपाल के निकाह काजी का इस्तीफा: बोले- गैर मुस्लिमों को शामिल करना स्वीकार नहीं; मुफ्ती को अध्यक्ष के स्वागत पर आपत्ति – Bhopal News

वक्फ बोर्ड विवाद में भोपाल के निकाह काजी का इस्तीफा:  बोले- गैर मुस्लिमों को शामिल करना स्वीकार नहीं; मुफ्ती को अध्यक्ष के स्वागत पर आपत्ति – Bhopal News


भोपाल2 मिनट पहले

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वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने इस्तीफा दे दिया है।

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से उपजा विवाद थम नहीं रहा है। ताजा घटनाक्रम में इस फैसले का विरोध करते हुए भोपाल में निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने इस्तीफा दे दिया है। नदवी ने निकाह काजी के पद के साथ ही दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के महासचिव पद से भी त्यागपत्र सौंपा है।

उन्होंने पहला इस्तीफा शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी जबकि दूसरा दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल कलाम कासमी को भेजा है। दोनों ही पत्रों में उन्होंने वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों और उनके समर्थन को अपने इस्तीफे का कारण बताया है।

नदवी ने लिखा- मुझे जो जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं,मैंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से उन्हें निभाने का प्रयास किया। वर्तमान परिस्थितियों में इन पदों पर बने रहना संभव नहीं रह गया है।

बोले- धार्मिक संस्था में हमवतन भाइयों का क्या काम?

दैनिक भास्कर से बातचीत में नदवी ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक धार्मिक और इस्लामिक संस्था है। ऐसे में इसमें गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जाना उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा, “धार्मिक संस्था में हमारे हमवतन भाइयों का क्या काम है? कम से कम जिम्मेदार लोगों को इतना तो कहना चाहिए था कि यह फैसला ठीक नहीं है।”

नदवी ने बताया कि उन्हें केवल गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति से ही आपत्ति नहीं है, बल्कि उसके बाद हुए घटनाक्रम ने भी उन्हें आहत किया। उन्होंने कहा- भोपाल में दो दिन पहले शहर काजी की मौजूदगी में नवगठित मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल का स्वागत किया गया। जिन लोगों से इस फैसले का विरोध करने की उम्मीद थी, उन्होंने विरोध दर्ज कराने के बजाय स्वागत किया।

भोपाल में सोमवार को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल का स्वागत किया गया था।

भोपाल में सोमवार को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल का स्वागत किया गया था।

मुफ्ती ने भी अध्यक्ष के स्वागत समारोह पर आपत्ति जताई

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल के स्वागत समारोह पर मुफ्ती मोहम्मद मसरूर ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा- धार्मिक संस्थाओं से जुड़े जिम्मेदार लोगों द्वारा इस तरह का सार्वजनिक स्वागत मुस्लिम समाज के एक वर्ग के लिए पीड़ादायक है।

उन्होंने वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मस्जिद कमेटियों के नवीनीकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा है और सिफारिशें मांगी जाती हैं। मसरूर ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वह धार्मिक संस्थाओं से जुड़े फैसलों को लेकर जागरूक रहे और आवश्यक सवाल पूछे।

मुस्लिम त्योहार कमेटी ने किया था प्रदर्शन

देश में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों की नियुक्ति हुई है। मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया है। सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के विरोध में सोमवार को भोपाल के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

इन दो हिंदू सदस्यों की वक्फ बोर्ड में नियुक्ति

अब जानिए मुस्लिम संगठन क्यों कर रहे फैसले का विरोध?

‘बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं’

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ मुस्लिम समाज की धार्मिक और सामाजिक संस्था है, जहां लोग अपनी संपत्ति अल्लाह की रजा के लिए वक्फ करते हैं।

उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड का गठन दो दिन पहले हुआ है, जिसमें पहली बार दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्यों को शामिल किया गया है। कमेटी इसी नियुक्ति का विरोध कर रही है।

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी-सदस्य प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर आए।

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी-सदस्य प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर आए।

जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड के गठन का आरोप

शमशुल हसन ने अयोध्या, सोमनाथ और मथुरा की धार्मिक संस्थाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि जब मुस्लिम समाज ने कभी उन संस्थाओं के प्रबंधन में प्रतिनिधित्व की मांग नहीं की, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की जरूरत क्यों महसूस की गई।

शमशुल हसन ने आरोप लगाया कि नए कानून के लागू होने के तुरंत बाद जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि नए सदस्यों की नियुक्ति करनी थी, तो मुस्लिम समाज के योग्य और अनुभवी लोगों, जैसे सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी।

कांग्रेस विधायक बोले- मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा

वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल करने के मामले में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी थी, जो सनव्वर पटेल को इतनी जल्दबाजी करनी पड़ी। मध्य प्रदेश शासन ने एक और गलती की है। दो अन्य समाज के लोगों को रखने का प्रावधान है, शासन ने तीन रख दिए। आयुक्त भी अन्य कास्ट के हैं।

तानाशाही नहीं चलेगी, मनमानी नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता मुख्यमंत्री मोहन यादव के पोस्टर लेकर पहुंचे। उन्होंने वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को सरकार का हस्तक्षेप बताया। प्रदर्शनकारियों ने “वक्फ बोर्ड में तानाशाही नहीं चलेगी”, “मनमानी नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए और नए वक्फ बोर्ड के गठन पर पुनर्विचार की मांग की। अयोध्या समेत अन्य मंदिरों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया गया और सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी हुई।

सरकार से आदेश वापस लेने की मांग

उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियां धार्मिक आस्था और समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके प्रबंधन में ऐसे लोगों को शामिल किया जाना चाहिए, जिन पर समुदाय को विश्वास हो। उनका दावा था कि इस फैसले से मुस्लिम समाज में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आदेश वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि निर्णय पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशभर में व्यापक रूप दिया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों की सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग।

प्रदर्शनकारियों की सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग।

कानून के दूरगामी और सकारात्मक नतीजे आएंगे: सारंग

प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि वक्फ कानून-2026 लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना है, जो खुशी और गर्व की बात है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि इस कानून के दूरगामी और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

सारंग ने कहा कि वक्फ बोर्ड को मस्जिद प्रबंधन समिति से जोड़कर देखना गलत है। वक्फ बोर्ड का दायरा केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी जिम्मेदारियां अधिक व्यापक हैं।

‘फैसले से वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी’

वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने का श्री हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच ने स्वागत किया है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि इस फैसले से वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।

इंदौर के मालपानी और राघौगढ़ के भार्गव बने सदस्य

मध्यप्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया है। सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

सरकार का दावा है कि वह वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के प्रावधानों के तहत बोर्ड का गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। नए बोर्ड में 10 सदस्य हैं। इससे पहले वक्फ अधिनियम-1995 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड के सदस्य केवल मुस्लिम समुदाय से ही होते थे।

केंद्र सरकार ने पिछले साल लागू किया था वक्फ संशोधन कानून

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे थे। अदालत ने पूछा कि यदि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जा सकता है, तो क्या भविष्य में मुसलमानों को भी हिन्दू धार्मिक ट्रस्टों के प्रबंधन में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी?

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति संजय कुमार और केवी विश्वनाथन भी शामिल थे, ने संशोधित कानून के विभिन्न प्रावधानों पर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। पीठ ने ‘वक्फ बाय यूजर’ की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। इस व्यवस्था के तहत यदि कोई संपत्ति लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए उपयोग में रही है, तो उसे औपचारिक दस्तावेजों के अभाव में भी वक्फ संपत्ति माना जा सकता है।

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