महाराजा रणजीत सिंह की 187वीं बरसी पर कीर्तन: गुरदासपुर में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग, ऐतिहासिक धरोहरों के अनदेखी के आरोप – Batala News

महाराजा रणजीत सिंह की 187वीं बरसी पर कीर्तन:  गुरदासपुर में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग, ऐतिहासिक धरोहरों के अनदेखी के आरोप – Batala News




गुरदासपुर जिले के दीनानगर स्थित ऐतिहासिक स्मारक ‘बारादरी’ में शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की 187वीं पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा, सत्कार और सम्मान के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए, जिसके बाद आयोजित धार्मिक समागम में भारी संख्या में पहुंची संगत ने इलाही गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से महाराजा रणजीत सिंह को कोटि-कोटि श्रद्धांजलि अर्पित की। इस विशेष समागम में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह और बाबा श्री चंद सेवा सोसायटी के प्रधान नरेंद्र सिंह वाड़ा ने विशेष रूप से शिरकत की। उनके साथ बड़ी संख्या में स्थानीय अकाली नेता, कार्यकर्ता और दूर-दराज से आई संगत मौजूद रही। समागम के दौरान रागी, ढाडी और कविशरी जत्थों ने महाराजा रणजीत सिंह के गौरवशाली जीवन, उनके बेमिसाल शासनकाल (खालसा राज) और सिख इतिहास में उनके योगदान पर प्रकाश डालकर संगत को निहाल किया। बादल सरकार ने दी थी मंजूरी, बाद की सरकारों ने की अनदेखी इस मौके पर पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह और स्थानीय नेता नरेंद्र सिंह वाड़ा ने ऐतिहासिक ‘बारादरी’ की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल सरकार के दौरान इस बहुमूल्य इमारत के संरक्षण की विस्तृत योजना तैयार की गई थी और इसे संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया गया था। इस ऐतिहासिक स्मारक और इसके आसपास की संपत्तियों के कायाकल्प व जीर्णोद्धार के लिए 7 से 8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि भी निर्धारित की गई थी। ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की मांग अकाली नेताओं ने आरोप लगाया कि शिरोमणि अकाली दल की सरकार जाने के बाद आई सरकारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का मामला आज तक अधर में लटका हुआ है। समागम के अंत में उपस्थित नेताओं और संगत ने सरकार से पुरजोर मांग की कि महाराजा रणजीत सिंह की यादों से जुड़ी इस ऐतिहासिक बारादरी के जीर्णोद्धार के कार्य को जल्द से जल्द शुरू करवाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने महान इतिहास से रूबरू हो सकें।



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