गुरदासपुर में रावी नदी का पंटून पुल बहा: आधा दर्जन गांवों का संपर्क टूटा, आवाजाही प्रभावित, प्रशासन से बोट उपलब्ध कराने की मांग – Batala News

गुरदासपुर में रावी नदी का पंटून पुल बहा:  आधा दर्जन गांवों का संपर्क टूटा, आवाजाही प्रभावित, प्रशासन से बोट उपलब्ध कराने की मांग – Batala News




पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के बीच गुरदासपुर में रावी नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से सीमावर्ती इलाके में बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रावी नदी के मकोड़ा पत्तन पर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास बसे गांवों को जोड़ने के लिए बनाया गया अस्थायी पंटून पुल (किश्तियों का पुल) पानी के तेज बहाव की चपेट में आकर आधा बह गया। इस हादसे के कारण नदी के उस पार बसे करीब आधा दर्जन गांवों का जिला मुख्यालय और देश के अन्य हिस्सों से संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे हजारों की आबादी टापू में कैद होने को मजबूर हो गई है। इन गांवों का टूटा संपर्क, रोजमर्रा की जिंदगी थमी पुल का एक बड़ा हिस्सा बह जाने के कारण नदी के पार स्थित सीमावर्ती गांवों ममिया, चैबे, टूर बरियाल मम्मी चकरंजा और अन्य नजदीकी ढाणियां का संपर्क टूट चुका है। संपर्क टूटने से इन गांवों में दूध, राशन, चिकित्सा और अन्य आपातकालीन व रोजमर्रा की जरूरी सेवाओं की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। लोगों की आवाजाही बंद है और कोई भी वाहन अब पार नहीं जा पा रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना के पानी छोड़ने का आरोप स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि रावी नदी का जलस्तर बिना किसी पूर्व सूचना या अलर्ट के अचानक बढ़ा दिया गया। अगर समय रहते चेतावनी जारी की जाती, तो पंटून पुल को सुरक्षित बांधा जा सकता था। पानी का बहाव इतना तेज था कि पहले वाहनों की आवाजाही रुकी और देखते ही देखते पुल का आधा हिस्सा बह गया, जिसके बाद अब पैदल निकलना भी जान जोखिम में डालने जैसा है। नावों का एकमात्र सहारा, पुख्ता प्रबंधों की मांग ग्रामीणों ने पंजाब सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि प्रभावित गांवों के लोगों के लिए तुरंत आपातकालीन सरकारी नावों (बोट्स) का प्रबंध किया जाए ताकि बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुँचाया जा सके। इसके साथ ही लोगों ने मांग की है कि युद्धस्तर पर कार्रवाई करते हुए बह चुके पंटून पुल को जल्द से जल्द दोबारा बहाल किया जाए। भविष्य में पीछे से पानी छोड़े जाने से पहले सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए समय पर ‘अर्ली वार्निंग’ (पूर्व सूचना) प्रणाली सुनिश्चित की जाए।



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