हिमाचल में भारी बारिश बाढ़ का खतरा बढ़ा, इंतजाम अधूरे: डैम का जलस्तर बढ़ा पर बांध का काम अधूरा, बीते साल पठानकोट के गावों में मची थी तबाही – Pathankot News

हिमाचल में भारी बारिश बाढ़ का खतरा बढ़ा, इंतजाम अधूरे:  डैम का जलस्तर बढ़ा पर बांध का काम अधूरा, बीते साल पठानकोट के गावों में मची थी तबाही – Pathankot News




हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पंजाब और हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों में एक बार फिर विनाशकारी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के चलते रंजीत सागर डैम और दरिया का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय निवासियों में दहशत पैदा कर दी है और उन्हें पिछले साल आई उस भयावह बाढ़ की याद दिला दी है, जिसने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया था। भयभीत ग्रामीण अब प्रशासन से समय रहते ठोस इंतजाम करने की गुहार लगा रहे हैं। गांव कोलियां और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों ने पंजाब और हिमाचल सरकार से मांग की है कि केवल कागजी चेतावनियां जारी करने के बजाय धरातल पर टीमों को तैनात किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि माधोपुर हेड के गेटों की समय पर मरम्मत और संचालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो सीमावर्ती इलाकों में एक बार फिर जान-माल की भारी तबाही होना तय है। पिछले साल की लापरवाही से नहीं लिया सबक: माधोपुर हेड और डैम का पानी बना आफत गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी भारी बारिश के कारण रंजीत सागर डैम में पानी खतरे के निशान को पार कर गया था। जब डैम से पानी छोड़ा गया, तो माधोपुर हेड के गेट समय पर पूरी तरह नहीं खुल सके थे। गेट न खुलने के कारण पानी ओवरफ्लो होकर सीधे आसपास के रिहाइशी इलाकों और खेतों में घुस गया था। इस बाढ़ का सबसे रौद्र रूप पठानकोट से सटे सीमावर्ती गांवों, विशेषकर गांव कोलियां और उसके आसपास देखने को मिला था। उस त्रासदी में तेज बहाव के कारण कई लोगों की जान चली गई थी, सैकड़ों घर ढह गए थे और बड़ी संख्या में मवेशी बह गए थे। दरिया लबालब, ग्रामीणों का आरोप- ‘वादे बड़े थे, पर जमीन पर काम अधूरा’ मौजूदा स्थिति यह है कि पीछे से आ रहे पानी के कारण दरिया एक बार फिर पूरी तरह लबालब भर चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले साल की इतनी बड़ी त्रासदी से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि सरकार और ड्रेनेज विभाग ने बाढ़ के तुरंत बाद वादा किया था कि दरिया के कच्चे बांध (कंजर्वेंसी बांध) को पूरी तरह पक्का किया जाएगा ताकि पानी गांवों की तरफ न आए। लेकिन मानसून शुरू होने के बाद भी यह काम आज तक अधूरा पड़ा है। लोगों का कहना है कि यदि इस बार भी पानी का स्तर पिछले साल जितना बढ़ा, तो सुरक्षा बांध न होने के कारण नुकसान का आंकड़ा पिछले साल से भी भयानक हो सकता है।



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