प्रशांत महासागर में बन रहा ‘गॉडजिला अल नीनो’: समुद्र में गर्मी बढ़ी, नासा ने सैटेलाइट फोटो जारी की; दुनियाभर में बाढ़-सूखा की आशंका

प्रशांत महासागर में बन रहा ‘गॉडजिला अल नीनो’:  समुद्र में गर्मी बढ़ी, नासा ने सैटेलाइट फोटो जारी की; दुनियाभर में बाढ़-सूखा की आशंका


नई दिल्ली13 मिनट पहले

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8 जून 2026 को मध्य और पूर्वी महासागर में सामान्य से ज्यादा ऊंची समुद्री सतह (लाल) दिखाई दे रही है।

दुनिया एक बार फिर बड़े जलवायु बदलाव की ओर बढ़ रही है। प्रशांत महासागर में अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) के मुताबिक पश्चिमी प्रशांत महासागर में वैसी ही परिस्थितियां बन रही हैं जैसी 1997 में बनी थीं।

उस समय इतिहास का सबसे शक्तिशाली ‘गॉडजिला अल नीनो’ बना था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हाल के सालों का सबसे प्रभावशाली अल नीनो हो सकता है। नासा के सैटेलाइट ने समुद्र में जमा हो रही भारी मात्रा में गर्मी की फोटो और आंकड़े जारी किए हैं।

1997-98 के अल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में भीषण बाढ़, सूखा, फसलों को भारी नुकसान और रिकॉर्ड स्तर की गर्मी दर्ज की गई थी। वैज्ञानिकों को आशंका है कि मौजूदा अल नीनो भी उसी दिशा में बढ़ सकता है।

समुद्र में गर्म पानी जमा हो रहा

नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच सैटेलाइट से मिले आंकड़ों के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के बड़े हिस्से में समुद्र का जलस्तर सामान्य से ज्यादा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक-

  • यह संकेत देता है कि समुद्र की सतह के नीचे बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है। जब समुद्र का पानी गर्म होता है तो वह फैलने लगता है, जिससे जलस्तर बढ़ जाता है। इसलिए जलस्तर में बढ़ोतरी को समुद्र के भीतर बढ़ती गर्मी का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
  • समुद्र की सतह के नीचे जमा गर्मी ही भविष्य में दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है। यदि गर्म पानी का भंडार बहुत बड़ा और गहरा हो जाए, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिलता है। इससे कई देशों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है।
  • समुद्र के भीतर ‘केल्विन वेव्स’ नाम की विशाल जल-तरंगें गर्मी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रही हैं। जब प्रशांत महासागर की व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तब इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के पास जमा गर्म पानी पूर्व की ओर दक्षिण अमेरिका के तटों की तरफ बढ़ने लगता है।
  • इसके कारण समुद्र की गहराई से ऊपर आने वाला ठंडा पानी कम हो जाता है और समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही स्थिति अल नीनो की पहचान मानी जाती है।

दुनियाभर सूखा-बाढ़ की आशंका

वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी प्रशांत महासागर अभी 1997 जितना गर्म नहीं हुआ है, लेकिन नई केल्विन वेव्स लगातार उस क्षेत्र की ओर बढ़ रही हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है।

इतिहास बताता है कि अल नीनो के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और एशिया के कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा भीषण गर्मी, फसल उत्पादन में कमी और मौसम संबंधी आपदाओं की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।

NOAA ने 11 जून को अल नीनो की घोषणा की थी

अमेरिका की राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने 11 जून को अल नीनो की स्थिति घोषित कर दी थी। यह घोषणा मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में लगातार कई महीनों तक सामान्य से अधिक तापमान दर्ज होने के बाद की गई।

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